Rohit Pawar Amol Mitkari Police Station Protest(फोटो क्रेडिट-X)
Ajit Pawar Death Case FIR Demand: मुंबई के मरीन ड्राइव पुलिस थाने में मंगलवार देर रात भारी हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दिग्गज विधायक रोहित पवार, अमोल मिटकरी और संदीप क्षीरसागर ने पुलिस थाने में डेरा डाल दिया और दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार की विमान दुर्घटना मामले में तत्काल FIR दर्ज करने की मांग पर अड़ गए। विधायकों और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई, जिसके बाद स्थिति को संभालने के लिए पुलिस उपायुक्त (DCP) प्रवीण मुंढे को खुद मौके पर पहुंचना पड़ा।
विधायकों का आरोप है कि अजित पवार की मौत कोई सामान्य दुर्घटना नहीं थी, बल्कि इसमें गहरी साजिश की बू आ रही है। उन्होंने पुलिस प्रशासन पर दबाव में काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि ठोस संदेह के बावजूद मामले को केवल ‘शिकायत आवेदन’ (Application) तक सीमित क्यों रखा जा रहा है।
मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन में रोहित पवार और अमोल मिटकरी बेहद आक्रामक तेवर में नजर आए। उन्होंने ड्यूटी पर मौजूद अधिकारियों से सीधे सवाल किया कि राज्य के इतने बड़े नेता की जान जाने के बाद भी VSR वेंचर्स कंपनी और उसके प्रबंधकों के खिलाफ केस दर्ज करने में देरी क्यों हो रही है? विधायकों ने स्पष्ट किया कि जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होती और दोषियों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू नहीं होती, वे पुलिस थाने से नहीं हटेंगे। हंगामे के चलते काफी देर तक थाने का कामकाज प्रभावित रहा।
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विधायकों की मांग है कि जिस चार्टर्ड विमान कंपनी (VSR Ventures) का प्लेन क्रैश हुआ, उस पर और सुरक्षा ऑडिट में ढिलाई बरतने वाले DGCA के अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए। रोहित पवार ने दावा किया कि उनके पास ऐसे साक्ष्य हैं जो बताते हैं कि विमान के रखरखाव में जानबूझकर कोताही बरती गई थी। रोहित पवार की ओर से इस संबंध में एक विस्तृत लिखित शिकायत भी दी जा रही है, जिसमें साजिश के संभावित पहलुओं का जिक्र किया गया है।
अमोल मिटकरी ने पुलिस अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा, “केवल आवेदन लेकर फाइलों में दबा देना अजित दादा के साथ अन्याय होगा। हमें जांच नहीं, बल्कि सीधी कार्रवाई चाहिए।” संदीप क्षीरसागर ने भी सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि पुलिस प्रशासन सबूतों के नष्ट होने का इंतजार कर रहा है। दूसरी ओर, पुलिस अधिकारियों का तर्क है कि वे तकनीकी जांच और DGCA की शुरुआती रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, जिसके बाद ही कानूनी रूप से FIR दर्ज की जा सकती है। हालांकि, विधायकों की जिद ने इस मुद्दे को एक नए राजनीतिक संघर्ष में तब्दील कर दिया है।