Rohini Khadse Slams Sanjay Gaikwad Shivaji Kon Hota Book Controversy
जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है, रोहिणी खडसे ने विधायक संजय गायकवाड को सुनाई खरी-खरी
Rohini Khadse Slams Sanjay Gaikwad: रोहिणी खडसे ने शिवाजी कौन था पुस्तक विवाद पर विधायक संजय गायकवाड को घेरा। कहा- सत्ताधारी समाज में भ्रम फैलाने में पीएचडी कर चुके हैं।
शिवाजी कौन था यह पुस्तक पढ़ते हुए रोहिणी खडसे (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Rohini Khadse Slams Sanjay Gaikwad News: बुलढाणा से शिवसेना विधायक संजय गायकवाड द्वारा ‘शिवाजी कोण होता’ पुस्तक के प्रकाशक को दी गई धमकी का मामला अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। राकांपा (शरद पवार गुट) की महिला प्रदेशाध्यक्ष रोहिणी खडसे ने सोशल मीडिया के माध्यम से गायकवाड पर जोरदार हमला बोला है। प्रसिद्ध कवि दिनकर की पंक्तियों “जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है” का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यह कहावत विधायक गायकवाड पर पूरी तरह सटीक बैठती है।
37 साल पुरानी किताब पर अचानक साक्षात्कार
रोहिणी खडसे ने सवाल उठाया कि दिवंगत कॉम्रेड गोविंद पानसरे द्वारा लिखित यह पुस्तक पिछले 37 वर्षों से समाज में पढ़ी जा रही है, लेकिन गायकवाड को इसका ‘साक्षात्कार’ अचानक आज ही क्यों हुआ? उन्होंने कहा कि गायकवाड कभी गरीब कर्मचारियों के साथ मारपीट करते हैं, तो कभी विवादित बयान देकर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश करते हैं। अब उन्होंने पुस्तक के प्रकाशक प्रशांत आंबी को फोन पर जान से मारने की धमकी देकर अपनी मानसिकता का परिचय दिया है।
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“जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है”हिंदीतील ही प्रसिद्ध कविता आमदार संजय गायकवाड यांना तंतोतंत लागू पडते. कधी गरीब कर्मचाऱ्यांना मारहाण करतात तर काही विचित्र आणि वादग्रस्त वक्तव्य करून प्रसिद्धी मिळवत असतात
विधायक की बौद्धिक क्षमता पर तंज कसते हुए रोहिणी खडसे ने कहा, “संजय गायकवाड से हम क्या उम्मीद कर सकते हैं? वाचन और साहित्य से उनका दूर-दूर तक कोई संबंध होने की संभावना बहुत कम है।” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल के लोग समाज में वैमनस्य और लोगों के बीच भ्रम पैदा करने में ‘पीएचडी’ कर चुके हैं। खडसे के अनुसार, ऐसे बयान अक्सर एक ‘लिटमस टेस्ट’ की तरह होते हैं, जिससे सत्ताधारी यह देखना चाहते हैं कि समाज में इन विवादों पर क्या प्रतिक्रिया होती है।
रोहिणी खडसे ने गायकवाड और गोविंद पानसरे के व्यक्तित्व की तुलना करते हुए कहा कि कॉम्रेड पानसरे जैसे विवेकशील लोग आखिरी सांस तक समाज की एकता और सत्य के मार्ग पर डटे रहे। इसी कारण वे आज भी अमर हैं और समाज में उनका सम्मान है। उन्होंने चेतावनी दी कि महापुरुषों के नाम पर राजनीति करने और वैचारिक मतभेदों को व्यक्तिगत धमकियों में बदलने की संस्कृति महाराष्ट्र के लिए घातक है।
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