आर्णी में खाद-बीज की कालाबाजारी का आरोप, वंचित बहुजन आघाड़ी ने कृषि विभाग को सौंपा ज्ञापन

Farmers Seed Price Fraud: यवतमाल के आर्णी में खाद-बीज की कृत्रिम कमी दिखाकर किसानों को लूटने वाले केंद्रों के खिलाफ VBA आक्रामक। कृषि विभाग को 7 दिनों में कार्रवाई का अल्टीमेटम दिया।
Fertilizer Black Marketing In Yavatmal
किसानो ने कृषि विभाग को निवेदन सौंपा (सोर्स - फोटो नवभारत)
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Fertilizer Black Marketing In Yavatmal: यवतमाल जिले के आर्णी में खरीफ सीजन की शुरुआत होते ही ग्रामीण इलाकों में किसानों को खाद और उन्नत बीजों के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है, जिसका फायदा उठाकर कुछ असामाजिक तत्व अन्नदाताओं की मजबूरी का सौदा कर रहे हैं। यवतमाल जिले की आर्णी तहसील में किसानों के साथ हो रही इसी कथित आर्थिक और मानसिक ठगी के खिलाफ 'वंचित बहुजन आघाड़ी'  ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है।

संगठन की ओर से स्थानीय कृषि विभाग को एक कड़ा और बेबाक चेतावनी पत्र सौंपा गया है, जिसमें तहसील के कुछ कृषि सेवा केंद्र संचालकों द्वारा रचे जा रहे चक्रव्यूह का पर्दाफाश किया गया है।

ग्लोबल क्राइसिस का बहाना बनाकर फैलाई जा रही अफवाह

वंचित बहुजन आघाड़ी ने अपने निवेदन में बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि तहसील के कुछ मुनाफाखोर कृषि केंद्र संचालक जानबूझकर बाजार में खाद और बीज की 'कृत्रिम कमी' का माहौल बना रहे हैं। ये संचालक सीधे-साधे ग्रामीण किसानों को डराने के लिए वैश्विक युद्ध, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों तथा लॉजिस्टिक्स की दिक्कतों का झूठा हवाला देकर अफवाहें फैला रहे हैं। इस डर के कारण कि कहीं आगे स्टॉक खत्म न हो जाए, गरीब किसान शासन द्वारा निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य से कई गुना अधिक कीमतों पर कृषि सामग्री खरीदने को मजबूर हो रहे हैं।

नकली और एक्सपायर्ड बीजों का रैकेट

संगठन ने यह भी उजागर किया है कि महंगे दामों पर घटिया सामग्री बेचने के साथ-साथ कई दूर-दराज के गांवों में बिना प्रामाणिकता वाले, निम्न गुणवत्ता के अथवा अवधि समाप्त हो चुके बीजों की धड़ल्ले से अवैध बिक्री की जा रही है। इससे किसानों की न सिर्फ लागत डूबने का खतरा है, बल्कि उनकी पूरी फसल बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई है। इस खुली लूट को रोकने के लिए वीबीए ने कानूनी चाबुक चलाने की मांग की है। संगठन ने बीज अधिनियम 1966, बीज नियम 1968, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 तथा भारतीय दंड संहिता (IPC) की धोखाधड़ी संबंधी सख्त धाराओं का हवाला देते हुए प्रशासन से निम्नलिखित कदम तुरंत उठाने को कहा है:

  • आर्णी तहसील के सभी निजी कृषि सेवा केंद्रों के गोदामों, स्टॉक रजिस्टरों, बिक्री बिलों और लाइसेंसों की आकस्मिक (सरप्राइज) जांच की जाए।
  • दोषी पाए जाने वाले संचालकों के खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के तहत तत्काल प्रभाव से लाइसेंस निलंबित या रद्द किए जाएं।
  • अवैध उगाही करने वाले ब्लैक मार्केटर्स पर फौजदारी  मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए।
  • प्रत्येक दुकान के बाहर आधिकारिक दर सूची प्रदर्शित करना अनिवार्य किया जाए और पक्का बिल देना सुनिश्चित हो।

VBA ने दिया 7 दिनों का अल्टीमेटम

वंचित बहुजन आघाड़ी के पदाधिकारियों ने कृषि विभाग को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि किसानों में फैली इस घबराहट और आशंका को दूर करने के लिए प्रशासन तुरंत एक आधिकारिक प्रेस नोट जारी करे, जिसमें यह स्पष्ट रूप से बताया जाए कि तहसील में खाद और बीज का पर्याप्त सरकारी भंडार उपलब्ध है, ताकि कोई भी किसान भ्रमित न हो।

संगठन ने कृषि विभाग के आला अधिकारियों को इस पूरे मामले में की गई कार्रवाई की लिखित रिपोर्ट देने के लिए सात दिनों की समयसीमा दी है। VBA ने साफ कहा है कि यदि इस अल्टीमेटम के बाद भी आर्णी में किसानों की लूट या नकली बीजों की बिक्री का एक भी मामला सामने आया, तो संगठन लोकतांत्रिक और उग्र तरीके से सीधे सड़कों पर उतरकर तीव्र जन-आंदोलन छेड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी दोषी अधिकारियों की होगी।

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