किताब का शीर्षक ही गलत है -संजय गायकवाड का बड़ा हमला, पानसरे की पुस्तक पर फिर शुरू हुआ विवाद
Sanjay Gaikwad Audio Clip: कॉम्रेड गोविंद पानसरे की किताब के शीर्षक और भाषा पर शिवसेना विधायक संजय गायकवाड ने जताई कड़ी आपत्ति। प्रकाशक को फोन पर दी गालियां, ऑडियो क्लिप वायरल होने पर दी सफाई।
- Written By: गोरक्ष पोफली
संजय गायकवाड (सोर्स: सोशल मीडिया)
Sanjay Gaikwad Audio Clip News: महाराष्ट्र की राजनीति में अपने बेबाक और अक्सर विवादास्पद बयानों के लिए जाने जाने वाले बुलढाणा के शिवसेना विधायक संजय गायकवाड एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार विवाद की जड़ स्वर्गीय कॉम्रेड गोविंद पानसरे द्वारा लिखित प्रसिद्ध पुस्तक ‘शिवाजी कोण होता…?’ (शिवाजी कौन था?) है। विधायक गायकवाड ने इस पुस्तक के शीर्षक और उसमें इस्तेमाल की गई भाषा को छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान बताते हुए प्रकाशक प्रशांत आंबी को फोन पर कड़ी फटकार लगाई और कथित तौर पर अश्लील भाषा का प्रयोग करते हुए धमकी दी।
ऑडियो क्लिप वायरल
सोशल मीडिया पर इस बातचीत की एक ऑडियो क्लिप तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें विधायक का गुस्सा साफ देखा जा सकता है। इस क्लिप के सामने आने के बाद जब विधायक गायकवाड से सवाल किया गया, तो उन्होंने पीछे हटने के बजाय स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि वह आवाज उन्हीं की है। उन्होंने कहा कि महाराज के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने वालों को वह इसी भाषा में जवाब देते हैं।
विधायक गायकवाड की सफाई
विधायक संजय गायकवाड ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनकी पत्नी को 21 तारीख को एक कार्यक्रम में यह पुस्तक भेंट स्वरूप मिली थी। जब उन्होंने घर पर इस पुस्तक को पढ़ा, तो वे दंग रह गए। उनके अनुसार पुस्तक के हर पन्ने पर छत्रपति शिवाजी महाराज का उल्लेख बिना सम्मानसूचक शब्दों के भाषा में किया गया है। गायकवाड का आरोप है कि पुस्तक में मराठों के गौरवशाली इतिहास के साथ छेड़छाड़ की गई है और यह सवाल उठाया गया है कि महाराज क्षत्रिय थे या नहीं।
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विधायक ने दावा किया कि उन्होंने पहले प्रकाशक को ‘भाई’ कहकर प्यार से फोन किया था, लेकिन जब उन्होंने महाराज के अपमान पर जवाब माँगा, तो प्रकाशक ने जाति का उल्लेख करते हुए मुजोरी दिखाई, जिसके बाद उनका पारा चढ़ गया।
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वैचारिक बनाम राजनीतिक लड़ाई
‘शिवाजी कौन था’ पुस्तक दशकों से महाराष्ट्र में वैचारिक विमर्श का हिस्सा रही है, जिसे वामपंथी विचारधारा के लोग महाराज के सही इतिहास को जन-जन तक पहुँचाने वाला माध्यम मानते हैं। हालांकि, विधायक गायकवाड जैसे नेताओं का मानना है कि ‘स्मार्टनेस’ के नाम पर महाराज के नाम का अनादर और उनके मूल इतिहास को संदिग्ध बनाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
