देश के 48 फीसदी बैंक Digital Fraud से प्रभावित, हर साल हो रहा 830 करोड़ का नुकसान

Digital Fraud India: बायोकैच रिपोर्ट के अनुसार देश के 48 फीसदी बैंक डिजिटल धोखाधड़ी से भारी प्रभावित हैं। साइबर ठगों से बैंकों को हर साल 830 करोड़ और ग्राहकों को 41 करोड़ का भारी नुकसान हो रहा है।
Digital Fraud: 48 Percent Indian Banks Affected By Cyber Scams Costing 830 Crore Annually Report
बैकों में डिजिटल फ्रॉड (सोर्स- AI इमेज)
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48 Percent Indian Banks Affected By Digital Fraud: वैश्विक सुरक्षा संस्था बायोकैच ने 25 देशों में एक विस्तृत अध्ययन कर अपनी अहम रिपोर्ट जारी की है। इस ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारतीय बैंकिंग सेक्टर इस समय सबसे बड़े डिजिटल धोखाधड़ी के गंभीर संकट से पूरी तरह गुजर रहा है। देश के करीब 48 फीसदी भारतीय बैंक इस खतरनाक साइबर ठगी और धोखाधड़ी से बहुत ही ज्यादा प्रभावित हैं। UI और UPI के बढ़ते चलन ने भारत में साइबर ठगी के मामलों में बहुत भारी और अभूतपूर्व वृद्धि कर दी है।

इस अध्ययन के दौरान सुरक्षा विशेषज्ञों ने करीब 14 हजार से अधिक लोगों से गहराई से बातचीत की है। सर्वे के अनुसार साइबर ठगी के कारण भारतीय बैंकों को सालाना 830 करोड़ रुपये से ज्यादा की बहुत बड़ी चपत लग रही है। इसके साथ ही आम ग्राहकों को भी हर साल ठगी से लगभग 41 करोड़ रुपये से अधिक का व्यक्तिगत नुकसान उठाना पड़ रहा है। करीब 58 फीसदी बैंक अधिकारियों ने भी माना कि उनके ग्राहकों को यह भारी व्यक्तिगत नुकसान लगातार झेलना पड़ रहा है।

UPI बना धोखाधड़ी का मुख्य जरिया

भारत में तुरंत पैसा ट्रांसफर करने वाले प्लेटफॉर्म UPI की जबरदस्त सफलता ठगों के लिए नया रास्ता खोल रही है। सर्वे में 66 फीसदी भारतीय बैंकिंग लीडर्स ने माना कि धोखाधड़ी बढ़ने का मुख्य जरिया तुरंत भुगतान प्रणाली यानी UPI ही है। यह दर दुनिया के बाकी देशों के 59 फीसदी के वैश्विक औसत से भी काफी ज्यादा है जो बहुत चिंताजनक है। आसानी से और तुरंत पैसा ट्रांसफर होने की वजह से साइबर ठग UPI को अपना सबसे आसान टारगेट बना रहे हैं।

AI तकनीक ने बढ़ाई बहुत मुश्किलें

सर्वेक्षण में शामिल 93 फीसदी भारतीयों ने माना है कि AI की वजह से स्कैम करने के तरीके ज्यादा जटिल हो गए हैं। ठगों के इन नए और तकनीकी तरीकों को आसानी से पकड़ में लाना अब बहुत ही ज्यादा मुश्किल हो गया है। 10 में से 9 लोगों ने कहा कि आने वाले समय में AI से जुड़े कामों और गलत गतिविधियों के बीच अंतर करना कठिन होगा। वहीं 95 फीसदी बैंक अधिकारी डिजिटल माध्यमों से सेकंडों में पैसा गायब होने की तेज रफ्तार से बहुत ज्यादा चिंतित हैं।

वित्तीय नुकसान के मामलों में भारी बढ़ोतरी

रिपोर्ट के अनुसार करीब 84 फीसदी भारतीय बैंकिंग दिग्गजों ने माना कि उनके यहां फ्रॉड से होने वाला वित्तीय नुकसान काफी बढ़ा है। यह भारी आंकड़ा 76 फीसदी के वैश्विक औसत से बहुत ही कहीं अधिक है जो पूरे सिस्टम के लिए चिंता का विषय है। आपको बता दें कि पिछले साल यह चौंकाने वाली संख्या भारत में सिर्फ 57 फीसदी ही दर्ज की गई थी। इसके साथ ही 90 फीसदी बैंक अधिकारियों ने यह भी कहा कि उनके संस्थानों में फ्रॉड की कोशिशें पहले से कहीं ज्यादा हुई हैं।

विशेषज्ञों की सख्त चेतावनी और सुझाव

वैश्विक औसत 81 फीसदी और भारत के पिछले साल के 70 फीसदी आंकड़े की तुलना में इस बार स्थिति ज्यादा खराब है। बायोकैच के प्रमुख गादी माजोर ने इस तेजी से बढ़ती डिजिटल धोखाधड़ी पर अपनी बहुत ही गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे डिजिटल बातचीत AI एजेंट पर आधारित होती जा रही है धोखाधड़ी के नए खतरे भी बढ़ रहे हैं। इंडस्ट्री को भविष्य में इन खतरों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए इसे बहुत ही गहराई से समझने पर ध्यान देना होगा।

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