

Rohini Khadse on Gas Crisis: मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे युद्ध के कारण उत्पन्न वैश्विक एलपीजी (LPG) संकट का असर अब भारतीय महानगरों की अर्थव्यवस्था पर गहराने लगा है। गुजरात के सूरत में गैस की भारी किल्लत के कारण छोटे होटलों, स्ट्रीट फूड दुकानों और ढाबों पर ताले लग गए हैं, जिससे हजारों कामगार बेरोजगार हो गए हैं। इस स्थिति के कारण उत्तर प्रदेश और बिहार के मजदूरों का 'रिवर्स माइग्रेशन' (गृह नगर वापसी) शुरू हो गया है। रविवार को सूरत के उधना रेलवे स्टेशन पर उमड़ी भारी भीड़ और पुलिसिया लाठीचार्ज के वीडियो सामने आने के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार गुट) की महिला प्रदेश अध्यक्ष रोहिणी खडसे ने महाराष्ट्र सरकार को कड़ा आगाह किया है।
रोहिणी खडसे ने सोशल मीडिया पर सूरत स्टेशन का एक विचलित करने वाला वीडियो साझा करते हुए कहा कि यह दृश्य हृदयविदारक है। उन्होंने आशंका जताई है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो जल्द ही मुंबई और पुणे जैसे शहरों में भी सूरत जैसे हालात पैदा हो जाएंगे। इन शहरों में पहले से ही कई रेस्टोरेंट और मेस गैस की कमी के कारण बंद होने की कगार पर हैं, जिससे वहां काम करने वाले मजदूरों और शिक्षा के लिए आए छात्रों के सामने 'रोटी, कपड़ा और मकान' का संकट खड़ा हो गया है।
सूरत के उधना रेलवे स्टेशन पर हजारों की संख्या में मजदूर अपने परिवारों के साथ गांव लौटने के लिए जमा हुए। ट्रेनों में जगह पाने की जद्दोजहद के बीच भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। रोहिणी खडसे ने इस घटना को सरकार की विफलता बताते हुए कहा कि गैस की कमी ने न केवल रोजगार छीना है, बल्कि लोगों के सामने दो वक्त के भोजन का संकट भी पैदा कर दिया है। उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वाली ट्रेनों की लंबी कतारें इस मानवीय संकट की गवाह बन रही हैं।
महाराष्ट्र के संदर्भ में बात करते हुए रोहिणी खडसे ने कहा कि मुंबई और पुणे जैसे शहरों में होटलों और रेस्तरां के बंद होने की खबरें पहले ही आनी शुरू हो गई हैं। उन्होंने उन बच्चों की दुर्दशा का जिक्र किया जो गांवों से शहरों में शिक्षा और बेहतर जीवन के लिए आए थे, लेकिन अब भोजन की कमी के कारण वापस जाने को मजबूर हैं। रोहिणी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "सोई हुई सरकार...जाग जाओ!", क्योंकि अगर आपूर्ति व्यवस्था में तत्काल सुधार नहीं हुआ तो महाराष्ट्र के रेलवे स्टेशनों पर भी जल्द ही ऐसी ही अफरा-तफरी देखने को मिल सकती है।
मध्य पूर्व के युद्ध ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर दिया है, जिससे एलपीजी के दाम बढ़ने के साथ-साथ उसकी उपलब्धता भी कम हो गई है। छोटे व्यापारियों के लिए ब्लैक में गैस खरीदना मुमकिन नहीं रह गया है, जिसके कारण वे अपने व्यवसाय बंद कर रहे हैं। रोहिणी खडसे ने अपील की है कि राज्य सरकार केंद्र के साथ समन्वय बिठाकर जल्द से जल्द गैस की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करे, ताकि मजदूरों का पलायन रोका जा सके और महानगरों की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह चरमराने से बचाया जा सके।