

Mumbai News: शिवसेना (उबाठा) नेता संजय राउत ने बुधवार को मराठा आरक्षण आंदोलन के समाधान और कार्यकर्ता मनोज जरांगे की भूख हड़ताल समाप्त कराने का श्रेय महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को दिया। राउत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और फडणवीस के कटु आलोचक रहे हैं। राउत ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि फडणवीस पर्दे के पीछे से काम कर रहे थे और मराठा आरक्षण पर कैबिनेट उप-समिति के साथ विचार-विमर्श में शामिल थे।
राउत ने कहा कि यदि सरकार ने इस मुद्दे का समाधान किया है और जरांगे की जान बचाई है, तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए। शिवसेना (उबाठा) नेता राउत ने कहा, ‘‘देवेंद्र फडणवीस इस मुद्दे को सुलझाने के लिए विचार-विमर्श में शामिल थे। वह पर्दे के पीछे रहकर काम कर रहे थे। सारा श्रेय फडणवीस को जाना चाहिए।''जरांगे और मराठा प्रदर्शनकारियों द्वारा मुख्यमंत्री की तीखी आलोचना का उल्लेख करते हुए राउत ने कहा, ‘‘मैं फडणवीस के धैर्य की भी सराहना करता हूं।"
राउत ने कहा कि हालांकि, दावा किया कि जब जरांगे अपना अनशन शुरू करने मुंबई आए थे, तो भाजपा नेताओं की भाषा अलग थी। राउत ने दावा किया कि फडणवीस को छोड़कर भाजपा नेताओं ने ‘‘अत्यधिक नफरत फैलाने'' की कोशिश की। शिवसेना (उबाठा) ने मराठा आंदोलन को लेकर उप-मुख्यमंत्री अजित पवार और एकनाथ शिंदे पर निशाना साधा। राउत ने कहा, ‘‘एकनाथ शिंदे और अजित पवार कहां थे?
उन्होंने विचार-विमर्श में हिस्सा क्यों नहीं लिया? क्या वे चाहते थे कि मामला बिगड़े और फडणवीस मुश्किल में पड़ें।'' जरांगे ने मंगलवार को अपने अनशन के पांचवें दिन जीत की घोषणा की, जब महाराष्ट्र सरकार ने उनकी अधिकांश मांगों को स्वीकार कर लिया। इसमें पात्र मराठों को कुनबी जाति प्रमाण पत्र प्रदान करना भी शामिल है, जिससे वे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को मिलने वाले लाभों में आरक्षण के पात्र हो जाएंगे।
(एजेंसी इनपुट के साथ)