मुंबई में रिश्वत लेते राशन अधिकारी गिरफ्तार, LLM प्रवेश प्रक्रिया बढ़ाने की मांग तेज

Mumbai News: मुंबई में एसीबी ने रिश्वतखोरी के मामले में राशन अधिकारी को रंगेहाथ पकड़ा। वहीं, मुंबई विश्वविद्यालय की एलएलएम प्रवेश प्रक्रिया को लेकर छात्रों ने आवेदन तिथि बढ़ाने की मांग की।
राशन अधिकारी रिश्वत लेते गिरफ्तार (pic credit; social media)
राशन अधिकारी रिश्वत लेते गिरफ्तार (pic credit; social media)
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Maharashtra News:  भ्रष्टाचार निरोधक विभाग (एसीबी) ने मुंबई के कांदिवली स्थित राशन विभाग कार्यालय में तैनात अधिकारी सचिन आत्राम को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई शिकायत मिलने के बाद की गई।

जानकारी के मुताबिक, शिकायतकर्ता कांदिवली की एक राशन दुकान में मैनेजर है। हाल ही में चावल से भरा एक ट्रक दुकान पर आया था। इसी दौरान सचिन आत्राम वहां पहुंचे और खुद को निरीक्षण अधिकारी बताते हुए सवाल उठाया कि राशन वितरण निरीक्षक की अनुपस्थिति में ट्रक का माल क्यों उतारा जा रहा है। इसके बाद उन्होंने प्रक्रिया में अड़चनें डालते हुए काम आगे बढ़ाने के लिए कथित रूप से रिश्वत की मांग की। शिकायतकर्ता ने इसकी जानकारी एसीबी को दी, जिसके बाद जाल बिछाकर आरोपी को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया गया। फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है।

दूसरी ओर, मुंबई विश्वविद्यालय की एलएलएम प्रवेश परीक्षा को लेकर छात्रों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। विश्वविद्यालय ने 26 अगस्त को ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू की थी और इसकी अंतिम तारीख 3 सितंबर तय की गई थी। लेकिन कई छात्रों ने आवेदन प्रक्रिया को जटिल बताते हुए अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग की है।

छात्रों का कहना है कि तकनीकी कारणों और दस्तावेज़ अपलोड करने में दिक्कतें आ रही हैं, जिसके चलते वे समय पर आवेदन पूरा नहीं कर पा रहे। उनका मानना है कि आवेदन की समयसीमा कम से कम तीन दिन और बढ़ाई जानी चाहिए। चूंकि परीक्षा इस माह के अंत में आयोजित की जाएगी, इसलिए कुछ अतिरिक्त दिनों की राहत मिलने से अधिक छात्रों को आवेदन का अवसर मिलेगा।

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि छात्रों की मांग पर विचार किया जा रहा है और यदि आवश्यक हुआ तो आवेदन की समयसीमा बढ़ाई जा सकती है।

एक ओर भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई ने आम नागरिकों को राहत दी है, वहीं दूसरी ओर एलएलएम प्रवेश प्रक्रिया में आ रही कठिनाइयों ने छात्रों को परेशान कर दिया है। अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय छात्रों की इस मांग पर क्या फैसला लेता है।

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