मृत्यु के बाद भी रोशन हुई जिंदगी: वर्धा में 10 महीनों में 85 हजार नेत्रदान संकल्प, 11नेत्रहीनों को मिली दृष्टि

Wardha Eye Donation News: वर्धा जिले में बीते 10 महीनों में 85 हजार नागरिकों ने मरणोपरांत नेत्रदान का संकल्प लिया। इस दौरान 31 नेत्रदान से 11 नेत्रहीनों को नई दृष्टि मिली है।
Awareness about eye donation increased in Wardha: 85 thousand people took the pledge in 10 months, 11 blind people got new sight.
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया)
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Health Department Wardha Campaign News: वर्धा में मृत्यु के बाद भी अपनी आंखों के माध्यम से इस सुंदर दुनिया को देखने का अवसर दूसरों को मिले, इसी मानवीय भावना के तहत बीते दस महीनों में वर्धा जिले के लगभग 85 हजार नागरिकों ने मरणोपरांत नेत्रदान का संकल्प पत्र भरकर सामाजिक जिम्मेदारी निभाई है। विशेष बात यह है कि इसी अवधि में जिले में 31 व्यक्तियों का मरणोपरांत नेत्रदान हुआ है, जिससे 11 नेत्रहीन व्यक्तियों को दृष्टि प्राप्त हुई है।

पूर्व में मरणोपरांत नेत्रदान को लेकर समाज में अनेक भ्रांतियां और गलत धारणाएं प्रचलित थीं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की पहल और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सहयोग से जिले के सभी आठों तहसीलों में समय-समय पर प्रभावी जनजागरूकता अभियान चलाए गए। इन अभियानों के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से सामने आ रहे हैं। जनजागरूकता के चलते बीते दस महीनों में 85 हजार से अधिक लोगों ने नेत्रदान का संकल्प लिया है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 31 व्यक्तियों के मरणोपरांत नेत्रदान के बाद सफल नेत्र प्रत्यारोपण किए गए, जिससे 11 लोगों को नई दृष्टि मिली है। नेत्रदान से न केवल अंधकार में जीवन जी रहे व्यक्तियों के जीवन में उजाला आता है, बल्कि उनके परिवारों को भी नई आशा मिलती है। उल्लेखनीय है कि एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो व्यक्तियों को दृष्टि मिल सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से आगे आकर नेत्रदान का संकल्प लेने और जरूरतमंदों के जीवन में प्रकाश लाने की अपील की है।

नेत्रदान पखवाड़े को मिला उत्साहपूर्ण प्रतिसाद

नेत्रदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए जिले में स्वास्थ्य विभाग के नेतृत्व में नेत्रदान पखवाड़ा मनाया गया। इस दौरान शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से नागरिकों का उत्साहपूर्ण प्रतिसाद मिला और बड़ी संख्या में लोगों ने नेत्रदान का संकल्प किया। वहीं पिछले वर्ष जिले में 27 व्यक्त्तियों ने मरणोपरांत नेत्रदान किया था, जिससे 9 व्यक्तियों पर सफल नेत्र - प्रत्यारोपण किए गए और उन्हें दृष्टि प्राप्त हुई।

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