‘हमें हल्के में न लें, आरपीआई कहीं नहीं जाएगी लेकिन सम्मान जरूरी’; एमएलसी टिकट न मिलने पर भड़के रामदास आठवले
Ramdas Athawale Warns Mahayuti MLC Election Controversy 2026: विधान परिषद चुनाव में एक भी सीट न मिलने से भड़के रामदास आठवले, महायुति सरकार को दी खुली चेतावनी।
- Written By: अनिल सिंह
विधान परिषद में जगह न मिलने से नाराज रामदास आठवले की महायुति को खुली चेतावनी (फोटो क्रेडिट-X)
Ramdas Athawale Warns Mahayuti: महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव 2026 के नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद से महायुति के भीतर सीटों के असंतुलित बंटवारे को लेकर असंतोष की परतें लगातार खुल रही हैं। कद्दावर नेताओं और सहयोगी दलों को दरकिनार किए जाने की कड़ी में अब केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास आठवले की पार्टी भी खुलकर सामने आ गई है। अपनी अनोखी राजनीतिक शैली और शायराना अंदाज के लिए जाने जाने वाले रामदास आठवले इस बार बेहद गंभीर और आक्रामक मूड में नजर आ रहे हैं। उन्होंने साफ किया है कि देश रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के सिद्धांतों पर चलने वाली उनकी पार्टी वफादारी निभाना जानती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बड़े दल उनके राजनीतिक अस्तित्व को ही नकार दें।
रामदास आठवले ने अपने पोस्ट में लिखा कि ‘आठवले कहीं नहीं जाएंगे और वे विश्वासघात नहीं करते’ यह बात पूरी तरह सच है क्योंकि वचन का पालन करना उनके स्वभाव में शामिल है। लेकिन महायुति के कर्णधारों को यह याद रखना चाहिए कि उनकी इस शराफत और वफादारी को कमजोरी मानकर उन्हें हाशिए पर धकेलने का प्रयास न किया जाए।
मुश्किल दौर की याद दिलाकर भाजपा-शिवसेना को घेरा
आठवले ने महायुति के बड़े भाई की भूमिका निभा रही भाजपा और शिवसेना को उनके पुराने और कठिन दिनों की याद दिलाई है। उन्होंने कहा कि आज सत्ता के सुख में भले ही कई नए चेहरे और पार्टियां महागठबंधन का हिस्सा बन चुकी हैं, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब भाजपा-शिवसेना के साथ कोई भी खड़ा होने को तैयार नहीं था। उस बेहद चुनौतीपूर्ण और कठिन समय में आरपीआई के कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर इस गठबंधन को जमीनी ताकत दी थी। जब आरपीआई का दलित और वंचित वोट बैंक इस गठबंधन से जुड़ा, तभी यह सही मायने में एक ‘महागठबंधन’ का रूप ले सका।
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अब नगर निगमों और महामंडलों में चाहिए सम्मानजनक हिस्सेदारी
विधान परिषद के रास्ते अपने नेताओं को उच्च सदन भेजने का मौका हाथ से निकलने के बाद अब रामदास आठवले ने सरकार के सामने अपनी नई शर्त रख दी है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा है कि यदि विधान परिषद में उन्हें उचित स्थान नहीं दिया गया, तो कम से कम आगामी दिनों में होने वाले विभिन्न सरकारी निगमों, बोर्डों और महामंडलों की नियुक्तियों में आरपीआई की सच्ची निष्ठा और मित्रता का सम्मान किया जाना चाहिए। आठवले ने मांग की है कि गरीब और शोषित वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वाले उनके नेताओं को इन निगमों में अध्यक्ष और सदस्य के पदों पर पर्याप्त मौका मिले।
आरपीआई कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश, आगे की रणनीति पर चर्चा तेज
केंद्रीय मंत्री की इस खुली चेतावनी के बाद पूरे महाराष्ट्र में आरपीआई के कार्यकर्ताओं का गुस्सा सातवें आसमान पर है। आठवले ने अपने पोस्ट के अंत में कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाते हुए लिखा कि संगठन के सभी कार्यकर्ता अब पूरी ताकत और नए जोश के साथ मैदान में उतर रहे हैं ताकि भविष्य में सत्ता के गलियारों में उनके अधिकारों और सम्मान के साथ कोई समझौता न हो सके। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि आगामी कुछ दिनों में महायुति सरकार ने महामंडलों की नियुक्तियों के जरिए आठवले को संतुष्ट नहीं किया, तो आगामी विधानसभा चुनावों में आरपीआई की यह नाराजगी महायुति के दलित समीकरणों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।
