राम कदम व उद्धव ठाकरे (सोर्स: सोशल मीडिया)
Ram Kadam Targeted Uddhav Thackeray: महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी के विधायक राम कदम ने आईएएनएस से बात करते हुए उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोला। उन्होंने ठाकरे को बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा से विश्वासघात करने वाला मुख्यमंत्री बताया। कदम ने तंज कसते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे का इतिहास औरंगजेब जैसा है।
बीजेपी विधायक राम कदम ने उद्धव ठाकरे पर आरोप लगाते हुए कहा कि ठाकरे ऐसे मुख्यमंत्री थे, जिन्होंने अपने पिता बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा के साथ विश्वासघात किया। कदम ने कहा कि उद्धव ठाकरे ने उन्हीं दुश्मनों को गले लगा लिया, जिनके खिलाफ बालासाहेब ने अपनी पूरी जिंदगी संघर्ष किया था।
राम कदम ने उद्धव ठाकरे के इतिहास की तुलना औरंगजेब से की। उन्होंने कहा कि ठाकरे का इतिहास औरंगजेब जैसा है, जिसने अपने पिता शाहजहां को कैद कर खुद ताज हासिल कर लिया था। कदम ने तंज कसते हुए कहा कि ठाकरे ने बालासाहेब के नाम का इस्तेमाल तो किया, लेकिन उनकी विचारधारा को पूरी तरह किनारे कर दिया।
राम कदम ने ‘वंदे मातरम’ विवाद पर भी उद्धव ठाकरे को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग ‘वंदे मातरम’ का विरोध करते हैं, उन्हीं के साथ बैठकर उद्धव ठाकरे बिरयानी खाते हैं। उन्होंने आगे कहा कि उनके मंचों पर पाकिस्तान के झंडे लहराए जाते हैं और फिर वे देशभक्ति की बात करते हैं। ये कितना बड़ा विरोधाभास है।
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राम कदम ने ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर उद्धव ठाकरे के साथी को ‘वंदे मातरम’ तक से परेशानी होती है, तो उन्हें देशभक्ति का प्रमाणपत्र देने का कोई हक नहीं है।
राम कदम ने बिहार विधानसभा चुनाव पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम से पहले ही यादव परिवार के एक सदस्य ने मान लिया है कि वे उसी के साथ जाएंगे जिसे बहुमत मिलेगा। उन्होंने दावा किया कि यह साफ इशारा है कि एनडीए की जीत तय है और विपक्ष में हार का डर बैठ गया है।
पुणे लैंड स्कैम मामले में राम कदम ने अपनी सरकार का बचाव किया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार किसी भी तरह की गड़बड़ी को छिपाने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर हमें कुछ छिपाना होता तो एफआईआर ही क्यों दर्ज करते?
कदम ने बताया कि सरकार ने तुरंत कार्रवाई की, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की अध्यक्षता में जांच समिति बनाई और तहसीलदार को निलंबित किया। भजापा नेता ने कटाक्ष किया कि ये उद्धव ठाकरे की ‘खिचड़ी खाने वाली सरकार’ नहीं है, जो घोटालों पर परदा डाल देती थी; हमारी सरकार पारदर्शिता में यकीन रखती है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)