Deepak Bhosale Ex Mayor Malegaon Kirit Somaiya
Deepak Bhosale Ex Mayor Malegaon: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता किरीट सोमैया द्वारा बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों के खिलाफ चलाया जा रहा अभियान अब उनके लिए ही गले की फांस बनता नजर आ रहा है। मालेगांव में 4,000 जन्म प्रमाण पत्र रद्द कराने के दबाव के बीच एक ऐसी चूक सामने आई है, जिसने महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल ला दिया है। सोमैया के आरोपों के कारण प्रशासन ने जिन लोगों के दस्तावेज रद्द किए, उनमें मालेगांव के पूर्व महापौर दीपक भोसले का नाम भी शामिल है, जो स्वयं को छत्रपति शिवाजी महाराज का वंशज मानते हैं।
इस घटना के बाद पूर्व महापौर दीपक भोसले और उनके समर्थकों ने मालेगांव नगर निगम की सीढ़ियों पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। भोसले ने आरोप लगाया कि किरीट सोमैया और नगर आयुक्त रवींद्र जाधव की मिलीभगत के कारण एक सम्मानित हिंदू परिवार को ‘बांग्लादेशी’ और ‘आतंकवादी’ घोषित कर दिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सोमैया सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते हैं, तो वे मुख्यमंत्री कार्यालय के सामने आत्मदाह करेंगे।
दीपक भोसले का परिवार मालेगांव की राजनीति में दशकों से सक्रिय है और एक प्रतिष्ठित समाजवादी पृष्ठभूमि रखता है। उनके पिता और चाचा कई वर्षों तक पार्षद रहे हैं, और उनकी पत्नी ज्योति भोसले भी 20 वर्षों तक पार्षद रही हैं। खुद को छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज मानने वाले इस हिंदू परिवार के जन्म प्रमाण पत्र रद्द होने से समाज में उनकी भारी बदनामी हुई है। भोसले का कहना है कि सोमैया के इस लापरवाह कदम ने उनके चरित्र और मानसिक शांति को गहरी चोट पहुंचाई है, जिससे अब समाज में सिर उठाकर चलना मुश्किल हो गया है।
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इस पूरे विवाद में मालेगांव नगर आयुक्त रवींद्र जाधव की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। दीपक भोसले का आरोप है कि कमिश्नर जाधव ने किरीट सोमैया को गलत और भ्रामक जानकारी उपलब्ध कराई, जिसके आधार पर यह सूची तैयार की गई। भोसले ने प्रशासन से मांग की है कि कमिश्नर जाधव का ‘नार्को टेस्ट’ कराया जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उन्होंने सोमैया को किस आधार पर सम्मानित नागरिकों के नाम बांग्लादेशियों की सूची में डालने के लिए उकसाया। इस तकनीकी चूक ने अब प्रशासनिक भ्रष्टाचार और राजनीतिक दबाव के गठजोड़ की ओर इशारा कर दिया है।
मुसलमानों को लक्षित कर शुरू किया गया यह अभियान अब हिंदू परिवारों पर भारी पड़ने लगा है, जिससे भाजपा की रणनीति पर भी सवाल उठ रहे हैं। मालेगांव जैसे संवेदनशील शहर में एक प्रतिष्ठित हिंदू नेता और पूर्व महापौर को बाहरी घोषित करना सोमैया के लिए भारी पड़ सकता है। जानकारों का मानना है कि यदि यह मामला शांत नहीं हुआ, तो इसका असर आगामी चुनावों में मराठा और हिंदू वोटों पर पड़ सकता है। विपक्ष को भी एक बड़ा मुद्दा मिल गया है कि किस तरह ‘देशभक्ति’ के नाम पर मूल निवासियों का अपमान किया जा रहा है।