राज्यसभा चुनाव 2026: पार्थ पवार की जीत के लिए अमित शाह ने बनाया मास्टर प्लान, महायुति में सीटों का गणित तय
Rajya Sabha Election 2026: महाराष्ट्र राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए महायुति और एमवीए ने कसी कमर। अमित शाह और सुनेत्रा पवार की बैठक के बाद पार्थ पवार की राह हुई आसान।
- Written By: अनिल सिंह
Parth Pawar NCP RS Candidate and Amit Shah (फोटो क्रेडिट-X)
Maharashtra Rajya Sabha Election: महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय सबसे बड़ी हलचल राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर है। निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, नामांकन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और सभी प्रमुख दलों ने अपनी बिसात बिछा दी है। उपमुख्यमंत्री और एनसीपी (अजित गुट) की अध्यक्ष सुनेत्रा पवार ने हाल ही में मुंबई में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की, जिसके बाद महायुति के भीतर सीटों के बंटवारे और वोटिंग रणनीति को लेकर स्पष्टता आती दिख रही है।
चुनाव में अब केवल दो सप्ताह शेष हैं और ‘प्रेफरेंशियल वोटिंग’ (वरीयता मत) के गणित ने निर्दलीय और छोटे दलों के विधायकों की अहमियत को आसमान पर पहुंचा दिया है।
पार्थ पवार की उम्मीदवारी और एनसीपी की साख
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने पार्थ पवार को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर यह स्पष्ट कर दिया है कि यह चुनाव उनके लिए शक्ति प्रदर्शन का जरिया है। अजित पवार के निधन के बाद यह पहला बड़ा चुनाव है, जहाँ सुनेत्रा पवार के नेतृत्व की परीक्षा होनी है। विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) भी एक संयुक्त उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है ताकि महायुति के अतिरिक्त वोटों में सेंध लगाई जा सके। पार्थ पवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए भाजपा अपने अतिरिक्त कोटे के वोट एनसीपी को हस्तांतरित करने पर सहमत हुई है।
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अमित शाह का मुंबई दौरा और ‘ऑपरेशन कोऑर्डिनेशन’
गृह मंत्री अमित शाह के मुंबई दौरे का मुख्य केंद्र महायुति के तीनों घटकों भाजपा, शिवसेना (शिंदे) और एनसीपी (अजित) के बीच समन्वय स्थापित करना था। सूत्रों के अनुसार, शाह ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राज्यसभा की किसी भी सीट पर क्रॉस-वोटिंग का जोखिम नहीं लिया जाना चाहिए। बैठक में उन विधायकों की सूची तैयार की गई है जो ‘नाराज’ चल रहे हैं या जिनके पाला बदलने की चर्चा है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस को सामूहिक रूप से इन विधायकों को साधने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
एमवीए की रणनीति और आंकड़ों का खेल
दूसरी ओर, महाविकास अघाड़ी (MVA) ने भी अपनी कमर कस ली है। शरद पवार और उद्धव ठाकरे के बीच हुई बैठकों के बाद यह संकेत मिले हैं कि विपक्ष किसी एक सीट पर ‘टक्कर’ देने के लिए निर्दलीय विधायकों को अपने पाले में करने की कोशिश करेगा। वर्तमान विधानसभा की संख्या बल के आधार पर महायुति का पलड़ा भारी है, लेकिन गुप्त मतदान (Secret Ballot) न होने के बावजूद रणनीतिक प्रबंधन चुनाव के नतीजों को प्रभावित कर सकता है। आगामी 15 दिन महाराष्ट्र की सत्ता के भविष्य और गठबंधन की मजबूती का लिटमस टेस्ट साबित होंगे।
