पाकिस्तान तो दलाल है ही, पर भारत की कूटनीति कमजोर क्यों? ईरान युद्ध पर प्रियंका चतुर्वेदी का वार
Priyanka Chaturvedi On Pakistan: ईरान युद्ध पर सर्वदलीय बैठक में सरकार ने पाक को 'दलाल' कहा। प्रियंका चतुर्वेदी ने समर्थन के साथ भारत की कूटनीतिक देरी पर सवाल उठाए। राउत ने घेरा।
- Written By: अनिल सिंह
Priyanka Chaturvedi On Pakistan Dalal Nation (फोटो क्रेडिट-X)
Priyanka Chaturvedi On Pakistan Dalal Nation: ईरान-इजरायल युद्ध के बीच पश्चिम एशिया में उपजे तनाव ने भारत की घरेलू राजनीति में एक नया विवाद छेड़ दिया है। सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के एक कड़े बयान ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। सरकार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत, पाकिस्तान की तरह कोई ‘दलाल’ राष्ट्र नहीं है, जिस पर विपक्षी दल शिवसेना (UBT) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी और संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
विपक्ष ने सरकार के रुख का समर्थन तो किया, लेकिन भारत की कूटनीतिक भूमिका और निर्णय लेने में हुई देरी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
I don’t have one bit of a problem if Aatankistan is referred to as a dalal. That is what that nation is. But I certainly have a problem with the way India took sides in the war, belatedly reached out to Iran and now finds itself nowhere in negotiating peace in the region. — Priyanka Chaturvedi🇮🇳 (@priyankac19) March 26, 2026
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प्रियंका चतुर्वेदी का तंज: “पाकिस्तान वाकई दलाल है, लेकिन भारत…”
शिवसेना (UBT) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर सरकार के बयान पर अपनी राय रखी। उन्होंने लिखा, “मुझे इस बात पर जरा भी आपत्ति नहीं है कि ‘आतंकिस्तान’ को दलाल कहा जाए, वह मुल्क वाकई में दलाल ही है।” हालांकि, उन्होंने तुरंत सरकार की विदेश नीति को घेरते हुए कहा कि उन्हें इस बात से आपत्ति है कि भारत ने इस युद्ध में जिस तरह का पक्ष लिया और ईरान से संपर्क साधने में देरी की। चतुर्वेदी के अनुसार, इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में शांति वार्ता के दौरान भारत की भूमिका नगण्य नजर आ रही है।
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संजय राउत का सवाल: “क्या पुतिन भी दलाल कहलाएंगे?”
सर्वदलीय बैठक के बाद शिवसेना नेता संजय राउत ने भी सरकार की शब्दावली पर कड़ा ऐतराज जताया। राउत ने पूछा कि अगर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस युद्ध में मध्यस्थता का प्रयास करते हैं, तो क्या भारत सरकार उन्हें भी ‘दलाल’ कहेगी? विपक्ष का मुख्य आरोप यह है कि सरकार ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु पर शोक व्यक्त करने में बहुत देरी की, जो भारत की नैतिक कमजोरी को दर्शाता है। विपक्ष का तर्क है कि भारत जैसे बड़े राष्ट्र को मध्यस्थ की भूमिका में होना चाहिए था, न कि दर्शक की।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर का कड़ा रुख और सरकार का पक्ष
सूत्रों के मुताबिक, सर्वदलीय बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने विपक्षी नेताओं को स्पष्ट किया कि ईरान युद्ध के मामले में पाकिस्तान के मध्यस्थता प्रयासों का कोई मोल नहीं है, क्योंकि 1981 से ही अमेरिका उस देश का इस्तेमाल अपनी जरूरतों के लिए कर रहा है। जयशंकर ने दो टूक कहा, “हम दलाल राष्ट्र नहीं हैं।” सरकार ने विपक्ष के उन आरोपों को खारिज किया कि भारत चुप है। सरकार ने तर्क दिया कि विदेश सचिव ने तुरंत ईरानी दूतावास का दौरा किया था और सरकार की प्राथमिकता खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा और देश की ऊर्जा जरूरतों (ईंधन) को सुरक्षित करना है।
