पैर के बजाय सीने में क्यों मारी गोली? आर्या एनकाउंटर में घिरी मुंबई पुलिस, कई राज हुए दफन

Arya Powai Incident Mumbai: पवई एनकाउंटर पर कई सवाल उठ रहे है। क्या यह टल सकता था? गोली पैर में क्यों नहीं मारी गई? मुंबई पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में है।
Arya Powai Incident Mumbai: पवई एनकाउंटर पर कई सवाल उठ रहे है। क्या यह टल सकता था? गोली पैर में क्यों नहीं मारी गई? मुंबई पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में है।
पवई आर्या एनकाउंटर (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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Mumbai Police Encounter: पवई में हुई उस घटना का खौफनाक अंत हो गया है, लेकिन उसके बाद कई अनगिनत सवाल उठने लगे हैं, जिसकी वजह से कहीं न कहीं मुंबई पुलिस कटघरे में दिख रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि एनकाउंटर क्यों किया गया? गोली छाती की जगह पैर में क्यों नहीं मारी गई? हालांकि कई सवाल अभी भी बाकी हैं।

क्या इस स्थिति को पूरी तरह टाला जा सकता था? क्या बिना गोली चलाए बच्चों को बचाना संभव था? जब विशेष पुलिस टीमें पहले से मौजूद थीं, तो स्थानीय पुलिस परिसर में क्यों घुसी और इस कार्रवाई की अनुमति किसने दी? क्या अधिकारी शहरी बंधक स्थिति से निपटने के लिए बुलेटप्रूफ जैकेट और हेलमेट से लैस थे?

कई राज हुए दफन

क्या बातचीत के वक्त रोहित ने पुलिस को बताया था कि उसे किससे बात करनी है? क्या उस इंसान को जो मंत्री या पावरफुल व्यक्ति था, इसकी जानकारी दी गई थी? उसके बाद एनकाउंटर के आदेश दिए गए? अनगिनत सवाल और राज आर्या के साथ ही दफन हो गए। वहां पर पुलिस पूरी तैयारी के साथ आई हुई थी। दो घंटे से अधिक नेगोशिएशन चला। क्या पुलिस पर प्रेशर बनाया गया क्योंकि जिस पार्टी के नेता का इसमें नाम आया है उसी पार्टी की सरकार में बदलापुर वाले आरोपी का भी एनकाउंटर हुआ था।

आर्या ने दरवाजों, खिड़कियों पर लगाया था सेंसर

पवई स्थित आर ए स्टूडियो में 17 बच्चों और दो वयस्कों को बंधक बनाने वाले रोहित आर्या ने अपने बचाव के लिए खिड़कियों और दरवाजों पर लोगों की आवाजाही और गतिविधियों का पता लगाने वाले सेंसर लगा रखे थे और सीसीटीवी को भी एक दिशा में घुमा दिया था। आर्या मुंबई पुलिस द्वारा बंधकों को मुक्त कराने के लिए चलाए गए बचाव अभियान में मारा गया था। आर्या ने 10 से 12 वर्ष की आयु के लड़के-लड़कियों को बंधक बना लिया था, जो एक वेब सीरीज के ऑडिशन के लिए उसके बुलावे पर आए थे। पुलिस ने तीन घंटे तक चले बंधक ड्रामे के बाद बच्चों को बचा लिया। ऑपरेशन के दौरान गोली लगने से आर्या की मौत हो गई। पुलिस को अंदर आने से रोकने के लिए उसने सभी दरवाजों और खिड़कियों पर गति संसूचन (मोशन डिटेक्शन) सेंसर लगा रखे थे।

पुलिस और आर्या के बीच दो घंटे तक चली बातचीत

उसने सभी सीसीटीवी कैमरों को भी एक ही दिशा में घुमा दिया था ताकि उनमें कुछ भी पता न चल सके। जब पुलिस की एक टीम बंधकों को मुक्त कराने के लिए बाथरूम के रास्ते घटनास्थल पर दाखिल हुई, तो सेंसर पर उसकी नजर पड़ी। आर्या दोपहर करीब 12 बजे आरए स्टूडियो आया और करीब एक घंटे बाद हॉल में ताला लगाकर बच्चों को बंधक बना लिया। कुछ बच्चों द्वारा हॉल की खिड़कियों से मदद के लिए चिल्लाने और इशारे करने की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची।

उन्होंने बताया कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और आर्या के बीच दो घंटे तक बातचीत चलती रही, लेकिन आरोपी नहीं माना, जिसके बाद मौके पर बुलाई गई दमकल टीम ने बाथरूम की खिड़की तोड़ दी। तीन पुलिसकर्मी टूटी खिड़की से हॉल में घुसे, जिसके बाद आर्य ने उन पर एयरगन तान दी और फिर गोलियां चला दीं। आत्मरक्षा में एक इंस्पेक्टर द्वारा की गई जवाबी गोलीबारी में आर्या के सीने में गोली लगी, जिससे बाद में उसकी मौत हो गई। जांच अपराध शाखा को सौंप दी गई है, जबकि बरामद सामान फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है।

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