
नायलॉन मांजे से बचाने की कोशिश। (सौजन्यः सोशल मीडिया)
मुंबई: मकर संक्रांति का पर्व एक नई आशा, उम्मीद और उमंग लेकर आता है। देशभर में मकर संक्रांति का पर्व विभिन्न अलग-अलग नामों से जाना जाता है और इसे विभिन्न तरीकों से मनाया भी जाता है। ‘पतंगबाजी’ इस पर्व का खास आकर्षण होता है। लेकिन पतंगबाजी पर कुछ सालों से नायलॉन मांझा का जाल छा गया है, जिससे सिर्फ इंसान ही नहीं, बल्कि पशु-पंछी भी आहत होते हैं।
नायलॉन मांझे के इस तेज कतार से बचाने की कोशिश ‘वन्यजीव कल्याण समूह’ काफी सालों से कर रहा है। मकर संक्रांति के अवसर पर तीन दिवसीय अभियान के तहत पशु कार्यकर्ताओं ने मुंबई में पतंग के मांझे से घायल हुए 60 से अधिक पक्षियों को बचाया है। वन्यजीव कल्याण समूह के एक प्रतिनिधि ने बृहस्पतिवार को इसकी जानकारी दी।
प्रतिनिधि ने बताया कि भारत के विभिन्न राज्यों में चीनी मांझे की बिक्री और निर्माण पर प्रतिबंध के बावजूद नायलॉन और कांच से बने मांझे का इस्तेमाल धड़ल्ले से जारी है। इतनाही नही तो लोग इसे गैर-जिम्मेदाराना तरीके से फेंक देते हैं।
‘रेसक्विंक एसोसिएशन फॉर वाइल्डलाइफ वेलफेयर’ यानी आरएडब्ल्यूडब्ल्यू के संस्थापक पवन शर्मा ने बताया कि 13 से 15 जनवरी तक आयोजित 3 दिवसीय शिविर के दौरान शहर भर में 60 से अधिक घायल पक्षियों को बचाया गया।
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उन्होंने बताया कि दुर्भाग्यवश कुछ पक्षी बचाए जाने से पहले ही मर गए, जबकि कुछ मांझे से लगी चोटों के कारण उपचार के लिए ले जाए जाने तक जीवित नहीं बच सके। इस अभियान में शामिल रिवाईल्ड नामक संस्था के प्रतिनिधि ने कहा कि बचाए गए पक्षियों की चिकित्सीय जांच की जा रही है और उनमें से कई की सर्जरी और उनके पुनर्वास की योजना बनाई गई है।
शर्मा ने कहा कि हम विभिन्न स्थानों पर पाए गए मांजे को बरामद कर उसका निपटान कर रहे हैं, ताकि यह और अधिक पक्षियों की जान न ले।
(एजेंसी इनपुट के साथ)






