Mumbai News: भीड़ और राजनीति का दबाव, लोकल ट्रेनों के लिए नए स्टेशन पर उठ रहे सवाल

Western Railway की लोकल सर्विसेज में विरार से डहाणू रोड तक के रेलवे रूट को काफी अहम माना जाता है। इस रूट पर रोजाना लाखों की तादाद मेंल लोग सफर करते हैं।
Western Railway
पश्चिम रेलवे (सौ. सोशल मीडिया )
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Mumbai News In Hindi: विरार से डहाणू रोड तक का रेलमार्ग पश्चिम रेलवे की लोकल सेवाओं में अहम कड़ी माना जाता है। रोजाना लाखों यात्री इस सेक्शन में सफ़र करते हैं। इसी भीड़ और भविष्य की जरूरत को देखते हुए मुंबई रेलवे विकास निगम ने यहां नये स्टेशनों की संभावनाओं को पहले ही चिह्नित कर रखा है।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक क्वाडरपुलिंग एजेंसी इस मार्ग पर अतिरिक्त स्टेशन बनाने के लिए कई जगहों पर बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर चिह्नित कर रही है, जिससे आने वाले समय में पश्चिम रेलवे को नए स्टेशन बनाते वक्त किसी प्रकार की दिक्कत न आए।

राजनीति और दबाव का समीकरण

रेलवे सूत्र मानते हैं कि नये स्टेशन यात्रियों की सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि स्थानीय राजनीति का भी हिस्सा बनते जा रहे हैं। कई गांवों और कस्बों के लोग लंबे समय से नये स्टेशनों की मांग कर रहे हैं। ऐसे में MRVC ने विकल्प खुला रखते हुए बुनियादी तैयारी कर दी है। अगर यात्री संख्या बढ़ी या फिर जनप्रतिनिधियों का दबाव आया, तो नये स्टेशन के काम में ज्यादा समय नहीं लगेगा।

कहां-कहां बनाए जाएंगे नये स्टेशन

विरार से डहाणू रोड के बीच नए रेलवे स्टेशनों का प्रस्ताव तैयार किया गया है। अभी इस रूट पर 9 स्टेशन है, लेकिन यात्रियों की बढ़ती भीड और सुविधा को देखते हुए 7 नए स्टेशन जोड़े जाएंगे, प्रस्तावित नए स्टेशनों के जुड़ने से स्टेशन मैध कुछ इस प्रकार होगा विरार वाधिवासरतोडी सफाले मकुसर केलवे रोड - चिटूपाड़ा - पालघर पांचाली बोईसर वंजरवाड़ा वानगांव बीएसईएस कॉलोनी-- डहाणू रोड।

इस परियोजना से न केवल यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि स्थानीय विकास को भी गति मिलेगी, मौजूदा समय में विरार से डहाणू रोड के बीच विरार, वैतरणा, सफ्राले, कैलवे रोड, पालघर, उमरोली, बोईसर, वनगांव और डहाणू रोड स्टेशन मौजूद हैं। लेकिन भविष्य में यात्रियों की संख्या बढ़ने या स्थानीय राजनीतिक दबाव की स्थिति में नए स्टेशन खोले जा सकते हैं।

कम नहीं होगा दबाव

विशेषज्ञों का कहना है कि मुंबई मेट्रो और अन्य प्रोजेक्ट के बावजूद पश्चिम रेलवे की लोकल सेवाओं पर दबाव कम नहीं होगा। ऐसे में, पहले से चिह्नित ये स्टेशन भविष्य की बड़ी राहत बन सकते हैं। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या रेलवे समय रहते इस योजना को अमल में लाएगा या फिर यह महज कागजी तैयारी बनकर रह जाएगी।

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