नवी मुंबई एयरपोर्ट विवाद: भूमिपुत्रों की चेतावनी, दीबा पाटिल के सिवा दूसरा नाम स्वीकार नहीं
Mumbai News: भूमिपुत्रों ने चेतावनी दी है कि यदि नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का नाम स्वर्गीय दीबा पाटिल के नाम पर नहीं रखा गया तो वे उद्घाटन नहीं होने देंगे। इसका बड़े पैमाने पर विरोध करेंगे।
- Written By: सोनाली चावरे
नवी मुंबई एयरपोर्ट (pic credit; social media)
Navi Mumbai Airport controversy: नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को लेकर विवाद और तेज हो गया है। भूमिपुत्रों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर एयरपोर्ट का नाम स्वर्गीय लोकनेता दीबा पाटिल के नाम पर नहीं रखा गया तो उद्घाटन हर हाल में रोका जाएगा। स्थानीय लोगों और संगठनों का कहना है कि दीबा पाटिल ने अपनी जमीन देकर इस प्रोजेक्ट को संभव बनाया है, ऐसे में एयरपोर्ट का नाम उन्हीं के नाम पर होना चाहिए।
6 अक्टूबर को भूमिपुत्रों ने विशाल विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। रविवार को कोपरखैरने के शेतकरी समाज मंदिर में हुई बैठक में इस आंदोलन की रूपरेखा तय की गई। बैठक की अध्यक्षता सांसद सुरेश म्हात्रे ने की और उन्होंने कहा कि भूमिपुत्रों की मांग जायज है और इसके लिए सबको एकजुट होना होगा।
अब तक केंद्र सरकार की ओर से अंतिम अधिसूचना जारी नहीं हुई है। जबकि राज्य सरकार ने एयरपोर्ट का नाम दीबा पाटिल रखने के प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी देकर केंद्र को भेज दिया है। लेकिन देरी के कारण असंतोष बढ़ रहा है। स्थानीय संगठनों का कहना है कि उद्घाटन की तारीख तय होने से पहले नाम की घोषणा करना जरूरी है, वरना आंदोलन और तेज होगा।
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गौरतलब है कि नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को नागर विमानन मंत्रालय से ऑपरेशन लाइसेंस मिल चुका है। यह उपलब्धि प्रोजेक्ट की बड़ी सफलता मानी जा रही है और अब एयरपोर्ट के चालू होने की उलटी गिनती शुरू हो गई है। लेकिन नामकरण के विवाद ने इसे राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बना दिया है।
भूमिपुत्रों का कहना है कि यह सिर्फ नामकरण का मामला नहीं बल्कि सम्मान का सवाल है। दीबा पाटिल ने किसानों और स्थानीय लोगों के अधिकारों की लड़ाई लड़ी थी। उनका नाम नवी मुंबई की पहचान और इतिहास से जुड़ा है। यही वजह है कि लोग किसी और नाम को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।
आंदोलनकारियों ने साफ कहा है कि अगर मांग पूरी नहीं हुई तो उद्घाटन समारोह बाधित किया जाएगा। अब देखना होगा कि सरकार नामकरण को लेकर अंतिम फैसला कब लेती है और क्या भूमिपुत्रों का गुस्सा शांत हो पाएगा या नहीं।
