पहचान-पत्र से गायब राष्ट्र प्रतीक! आव्हाड ने सरकार पर लगाया साजिश का आरोप
एनसीपी के नेता जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि पहचान-पत्र से अशोक स्तंभ गायब कर दिया गया है। ये सिर्फ छवि नहीं, ये भारत की अस्मिता है। सरकार को इससे परहेज़ क्यों है? यह सवाल उन्होंने किया।
- Written By: आंचल लोखंडे
पहचान-पत्र से गायब राष्ट्र प्रतीक (सौजन्यः सोशल मीडिया)
मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा के सत्र की शुरुआत एनसीपी के तेजतर्रार विधायक जितेंद्र आव्हाड ने एक नए मुद्दे को लेकर की। उन्होंने जैसे ही पहचान-पत्र लहराया, सदन में हलचल मच गई। आव्हाड ने मीडिया के कैमरों के सामने गुस्से में कहा, “पहचान-पत्र से अशोक स्तंभ गायब कर दिया गया है। ये सिर्फ छवि नहीं, ये भारत की अस्मिता है। सरकार को इससे परहेज़ क्यों है?” उन्होंने ये सवाल उठाकर सियासी हलकों में आग लगा दी, “क्या सरकार अब संविधान के प्रतीकों को भी बदलना चाहती है?”
आव्हाड के इस दावे के बाद बाकी विपक्षी नेता भी हरकत में आ गए। हर तरफ से सरकार पर हमला शुरू हो गया। रोहित पवार ने तो सरकार की नीयत पर सीधा सवाल दाग दिया कि पहले संविधान बदलने की बात, फिर संसद में नए प्रतीक, अब अशोक स्तंभ का गायब होना… ये महज इत्तेफाक है या एक सोची-समझी साजिश है। उन्होंने चेतावनी दी, “हम इस मुद्दे को ऐसे नहीं जाने देंगे। विधानसभा से लेकर सड़क तक हल्ला बोल होगा!”
“अशोक स्तंभ ही आपल्या देशाची ओळख आहे. ही ओळख पुसून टाकण्याचा प्रयत्न सध्या सरकार करत आहे, आणि आम्ही त्या प्रयत्नाचा तीव्र निषेध करतो.” अशी परखड भूमिका ‘नॅशनॅलिस्ट काँग्रेस पार्टी – शरदचंद्र पवार’ पक्षाचे माननीय विधिमंडळ गटनेते डॉ. जितेंद्र आव्हाड यांनी विधान भवन, मुंबई येथे… pic.twitter.com/pOqI1rbFUF — Nationalist Congress Party – Sharadchandra Pawar (@NCPspeaks) June 30, 2025
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कांग्रेस भी मैदान में कूदी
कांग्रेस नेताओं ने इस विवाद को “राष्ट्र के प्रतीकों का अपमान” करार देते हुए इसे बेहद शर्मनाक बताया। विपक्ष की एकजुटता देखते हुए सत्तापक्ष सकते में है। अब ये मसला केवल एक पहचान-पत्र का नहीं रहा। विपक्ष इसे संविधान की रक्षा की लड़ाई का नाम दे रहा है। मुंबई में इस हफ्ते एक बड़ी ‘हल्ला बोल रैली’ आयोजित की जा रही है, जहां सरकार को जनता के सामने कटघरे में खड़ा किया जाएगा।
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सरकार की चुप्पी में छिपा सस्पेंस
सरकार की ओर से अब तक कोई सफाई नहीं आई है। क्या ये महज डिज़ाइन की गलती थी? या फिर वास्तव में सत्ता के गलियारों में ‘नया भारत’ बनाने की सोच संविधान को पीछे छोड़ चुकी है? जवाब अभी धुंध में हैं, लेकिन विपक्ष पूरी तरह आक्रामक है। पहचान-पत्र से अशोक स्तंभ की गैरमौजूदगी ने सत्ता के गलियारों में तूफान खड़ा कर दिया है। विपक्ष ने इसे ‘संविधान बचाओ आंदोलन’ की शुरुआत मान लिया है। अब यह मुद्दा सदन की दीवारों को लांघकर जनता की अदालत में पहुंच चुका है।
