
मतदान के बाद उंगली पर लगी स्याही मिटाते हुए (सोर्स: सोशल मीडिया)
Election Ink Issue: मुंबई में बीएमसी चुनाव के लिए मतदान शुरू होते ही ‘अमिट स्याही’ को लेकर बड़ा विवाद छिड़ गया है। सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें मतदाता एसीटोन से स्याही मिटाते दिख रहे हैं। विपक्षी नेताओं ने इसे चुनावी पारदर्शिता पर हमला बताते हुए प्रशासन को घेरा है।
मुंबई में लोकतंत्र के महापर्व यानी बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) के चुनावों के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने चुनावी शुचिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गुरुवार को मतदान शुरू होते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आम मतदाताओं, राजनेताओं और यहां तक कि मीडियाकर्मियों के ऐसे कई वीडियो प्रसारित होने लगे, जिनमें वे मतदान के बाद अपनी उंगलियों पर लगी ‘पक्की’ स्याही को एसीटोन और नेल पॉलिश रिमूवर की मदद से आसानी से मिटाते हुए दिखाई दे रहे हैं।
इस विवाद को सबसे ज्यादा हवा तब मिली जब कांग्रेस की मुंबई इकाई की नेता और लोकसभा सदस्य वर्षा गायकवाड़ ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर एक वीडियो पोस्ट किया। इस वीडियो में उनके एक पार्टी सहयोगी और उनकी पत्नी अपनी उंगली पर लगी चुनावी स्याही को एसीटोन से पूरी तरह साफ करते हुए दिखाई दे रहे हैं। गायकवाड़ ने बीएमसी प्रशासन पर तीखा हमला करते हुए पूछा कि क्या बीएमसी अपनी जवाबदेही से पल्ला झाड़ रही है? उन्होंने बताया कि सुबह से ही उन्हें ऐसी अनगिनत शिकायतें मिल रही हैं कि इस बार इस्तेमाल की जा रही स्याही टिकाऊ नहीं है और इसे बहुत ही आसानी से हटाया जा सकता है।
मुंबई महानगरपालिका निवडणुकीत नेलपॉलिश रिमुव्हरने बोटावरची शाई जाते याचे हे प्रात्यक्षिक…
राज्य निवडणूक आयोगाकडून यावेळी प्रचंड गैरव्यवस्थापन झाले आहे. हा प्रकार दुर्दैवी आहे. शाईची टेस्टींग कोणी केली? अगोदरच काळजी घेतली नव्हती का?
अधिकाऱ्यांवर कारवाई झाली पाहिजे. pic.twitter.com/yySqVLimZT — Sachin Sawant सचिन सावंत (@sachin_inc) January 15, 2026
यह समस्या केवल आम जनता तक सीमित नहीं रही; एक टीवी चैनल के पत्रकार ने भी पनवेल में अपना वोट डालने के बाद स्टूडियो लौटकर लाइव या वीडियो के माध्यम से दिखाया कि कैसे एसीटोन ने उनकी उंगली से स्याही का निशान गायब कर दिया। विपक्ष का आरोप है कि इस बार बीएमसी चुनाव के प्रबंधन ने पारदर्शिता और जवाबदेही पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह भी पढ़ें:- ‘सैनिटाइजर से मिट रही चुनावी स्याही’, परिवार संग वोट डालने के बाद राज ठाकरे ने चुनाव आयोग को घेरा
वर्षा गायकवाड़ के अनुसार, चुनाव प्रक्रिया में न केवल स्याही का मुद्दा है, बल्कि मतदाताओं को आखिरी समय में दी गई रिश्वतों को भी नजरअंदाज किया गया है। साथ ही, कई मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से गायब मिले और लोगों को राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर अपना नाम ढूंढने में भारी तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
गायकवाड़ ने इन स्थितियों को “शर्मनाक” करार देते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग और बीएमसी को जनता के विश्वास की कोई परवाह नहीं है। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता का विश्वास हर कीमत पर सुरक्षित रखा जाना चाहिए, लेकिन मौजूदा प्रबंधन इसमें विफल दिख रहा है।
इन बढ़ते विवादों और आरोपों के बीच, बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। बीएमसी ने उन सभी रिपोर्टों और दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि स्याही आसानी से मिट रही है। प्रशासन ने अपने बयान में कहा कि स्याही मिटने की खबरें “तथ्यात्मक रूप से गलत” हैं।
बीएमसी के अनुसार, मतदान केंद्र पर निर्धारित प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया जा रहा है, जिसमें मतदान कर्मचारी मतदाता के बाएं हाथ की उंगली पर पक्की स्याही लगाते हैं और इसमें किसी भी प्रकार की गुणवत्ता की कमी नहीं है।






