शिवसैनिकों का विधायक प्रकाश सुर्वे के खिलाफ प्रदर्शन, प्रवीण दरेकर के भाई को टिकट मिलने से नाराज़गी

Shiv Sena Protest: मुंबई नगर निगम चुनाव में वार्ड नंबर 3 भाजपा को दिए जाने से नाराज़ शिवसैनिकों ने शिंदे गुट के विधायक प्रकाश सुर्वे के खिलाफ काले झंडे दिखाकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
Mumbai municipal election, Shiv Sena protest
Shiv Sena Protest:मुंबई नगर निगम चुनाव (सोर्सः सोशल मीडिया)
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BMC Election: मुंबई महानगरपालिका चुनाव के बीच एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना में असंतोष खुलकर सामने आ गया है। दहिसर–मगाठाणे विधानसभा क्षेत्र में शिवसैनिकों ने विधायक प्रकाश सुर्वे के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए उन्हें काले झंडे दिखाए। यह विरोध वार्ड नंबर 3 भाजपा के खाते में दिए जाने को लेकर किया गया।

शिवसैनिकों का आरोप है कि विधायक प्रकाश सुर्वे ने पहले प्रकाश पुजारी को वार्ड नंबर 3 से चुनाव की तैयारी करने का निर्देश दिया था। लेकिन नामांकन के अंतिम समय में यह वार्ड भाजपा को सौंप दिया गया और भाजपा ने विधान परिषद सदस्य प्रवीण दरेकर के भाई प्रकाश दरेकर को उम्मीदवार घोषित कर दिया। इससे स्थानीय शिवसैनिकों में भारी नाराज़गी फैल गई।

शिंदे गुट में उबाल, अंतिम समय में विरोध प्रदर्शन

मुंबई नगर निगम चुनाव के लिए नामांकन की समय-सीमा खत्म होने में महज एक घंटा शेष था, तभी मगाठाणे क्षेत्र में शिवसेना शिंदे गुट के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। शाखा प्रमुख प्रकाश पुजारी, उनकी बेटी और समर्थकों ने विधायक प्रकाश सुर्वे तथा भाजपा उम्मीदवार प्रकाश दरेकर के खिलाफ नारेबाजी की और काले झंडे दिखाए।

वार्ड नंबर 3 भाजपा को दिए जाने पर काले झंडे

प्रकाश पुजारी ने आरोप लगाया कि यह सीट भाजपा को इसलिए दी गई क्योंकि विधायक प्रकाश सुर्वे के बेटे की उम्मीदवारी को लेकर अन्य वार्डों में समझौता किया गया। वहीं, इच्छुक उम्मीदवार वैष्णवी पुजारी ने दावा किया कि वरिष्ठ नेताओं ने स्थानीय कार्यकर्ताओं को अंधेरे में रखते हुए बाहरी उम्मीदवार की घोषणा कर दी, जिससे कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट गया।

‘तैयारी कराओ और टिकट किसी और को’ का आरोप

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रकाश पुजारी की बेटी को वार्ड नंबर 3 से उम्मीदवार बनाए जाने का आश्वासन दिया गया था और पूरी तैयारी भी करवाई गई। लेकिन अंतिम समय पर सीट भाजपा को सौंप दिए जाने से शिवसैनिक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। इस घटनाक्रम ने शिंदे गुट की शिवसेना और भाजपा के बीच समन्वय को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं और चुनाव से ऐन पहले राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है।

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