Ankita Gupta Mumbai Software Engineer Varanasi (फोटो क्रेडिट-X)
Ankita Gupta Mumbai Software Engineer Varanasi: वाराणसी के प्रसिद्ध अस्सी घाट पर घूमने आई मुंबई की एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने उत्तर प्रदेश पुलिस की सुस्ती और कार्यप्रणाली को आइना दिखा दिया है। अंकिता गुप्ता नामक इस युवती ने न केवल तकनीक के जरिए अपना चोरी हुआ महंगा स्मार्टफोन ट्रैक किया, बल्कि पुलिस की मदद के बिना चोर के ठिकाने तक पहुँचकर एक बड़े मोबाइल स्नैचिंग गिरोह का पर्दाफाश भी कर दिया। यह घटना साबित करती है कि यदि ठान लिया जाए, तो तकनीक और साहस के बल पर न्याय हासिल किया जा सकता है।
अंकिता अपने परिवार के साथ वाराणसी की सैर पर थीं, जब अस्सी घाट पर भीड़ का फायदा उठाकर एक उच्चकोटे ने उनका फोन छीन लिया। अंकिता ने तुरंत भेलूपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने इसे केवल एक ‘गुमशुदगी’ का मामला मानकर ठंडे बस्ते में डाल दिया। पुलिस की इस ढुलमुल नीति और टालमटोल से परेशान होकर अंकिता ने खुद ही ‘डिटेक्टिव’ बनने का फैसला किया और अपने इंजीनियर दोस्तों की मदद ली।
मुंबई की अंकिता ने अपनी सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की स्किल्स का इस्तेमाल करते हुए फोन की लाइव लोकेशन को ट्रैक करना शुरू किया। रात के करीब 2 बजे फोन का सिग्नल अस्सी घाट से लगभग 6 किलोमीटर दूर ‘चांदपुर’ इलाके में दिखाई दिया। अंकिता बिना डरे अकेले ही उस सुनसान इलाके में पहुँच गईं और दोबारा पुलिस को सूचित किया। हालांकि, पुलिस वहां पहुँची तो सही, लेकिन बिना किसी ठोस तलाशी के वापस लौट गई, जिससे अंकिता की निराशा और बढ़ गई।
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हार न मानते हुए अंकिता अगले दिन सुबह 5 बजे फिर से उसी लोकेशन पर पहुँचीं और इस बार उन्होंने स्थानीय नागरिकों को अपने साथ लिया। लोगों की मदद से उन्होंने उस मकान मालिक को ढूंढा जिसका मोबाइल सिग्नल आ रहा था। जब एक संदिग्ध किराए के कमरे का ताला तोड़ा गया, तो अंदर का नजारा देखकर सबकी आँखें फटी रह गईं। वहां अंकिता के फोन के साथ-साथ लगभग 12 से 20 अन्य महंगे स्मार्टफोन बिखरे पड़े थे, जिन्हें अलग-अलग पर्यटकों से छीना गया था।
अंकिता के इस साहस के बाद यूपी पुलिस को मजबूरन मौके पर आना पड़ा और सभी चोरी के फोन जब्त किए गए। अंकिता की दृढ़ इच्छाशक्ति ने न केवल उनका अपना फोन वापस दिलाया, बल्कि उन दर्जनों अन्य लोगों के लिए भी उम्मीद जगाई जिनके फोन चोरी हो चुके थे। यह कहानी सिखाती है कि सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है, लेकिन अगर सिस्टम साथ न दे, तो जागरूक नागरिक खुद बदलाव ला सकते हैं। हालांकि, इस घटना ने अस्सी घाट जैसे संवेदनशील पर्यटन स्थल पर पुलिस की गश्त और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।