महाराष्ट्र SRPF भर्ती विवाद, प्राइवेट किताब से छापे गए 85 सवाल, रोहित पवार का फूटा गुस्सा
SRPF Exam Controversy: महाराष्ट्र SRPF भर्ती परीक्षा में बड़ा विवाद खड़ा हुआ, जहाँ 100 में से 85 सवाल एक निजी प्रकाशक की किताब से सीधे तौर पर लिए गए हैं। विधायक रोहित पवार ने सरकार पर निशाना साधा।
- Written By: गोरक्ष पोफली
महाराष्ट्र SRPF भर्ती विवाद (सोर्स: एआई फोटो)
SRPF Recruitment Exam Paper Plagiarism: महाराष्ट्र में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर विवादों के भंवर में फंस गई है। इस बार निशाना बना है राज्य राखीव पुलिस बल (SRPF) का भर्ती इम्तिहान। हाल ही में संपन्न हुई इस परीक्षा ने न केवल उम्मीदवारों को चौंका दिया है, बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। आरोप बेहद गंभीर हैं, दावा किया जा रहा है कि सरकारी अधिकारियों ने मेहनत करने के बजाय एक प्राइवेट पब्लिकेशन की किताब से पूरे का पूरा प्रश्नपत्र ही कॉपी-पेस्ट कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में महाराष्ट्र पुलिस और SRPF भर्ती के लिए लिखित परीक्षाएं आयोजित की गईं। एक प्रमुख घटना में यह आरोप लगाया गया कि SRPF भर्ती परीक्षा के दौरान अधिकारियों ने मौलिक प्रश्नपत्र तैयार करने की जहमत तक नहीं उठाई। हैरान करने वाली बात यह है कि 100 में से 85 प्रश्न सीधे तौर पर एक निजी प्रकाशन के प्रश्न सेट से उठाए गए थे।
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब यह पता चला कि परीक्षा केवल चोरी किए गए सवालों तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें नकल और डमी उम्मीदवारों के इस्तेमाल जैसी अनियमितताएं भी सामने आईं। यह खबर फैलते ही हजारों छात्रों में हड़कंप मच गया है, जो सालों से कड़ी मेहनत कर रहे थे।
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रोहित पवार का सरकार पर हमला
इस मुद्दे पर विपक्षी नेता रोहित पवार ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों के जरिए अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। पवार ने सवाल उठाया कि क्या यह केवल अधिकारियों की लापरवाही है या इसके पीछे कोई बड़ा आर्थिक लेन-देन छिपा है? एक निजी प्रकाशक के प्रश्न सेट से 85 प्रश्न जस के तस लेना, प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों की कामचोरी है या कुछ और? गरीब और मेहनती छात्र दिन-रात एक कर देते हैं, क्या उनके सपनों और भविष्य के साथ इस तरह का खिलवाड़ करना सही है?
रोहित पवार ने आगे कहा कि इससे पहले भी तलाठी भर्ती समेत कई अन्य परीक्षाओं में इसी तरह का खेल देखा गया है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सरकार से इस पूरे प्रकरण की तत्काल और उच्च स्तरीय जांच करने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की है।
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उम्मीदवारों के भविष्य पर संकट
भर्ती परीक्षाओं में लगातार हो रही इस तरह की धांधली ने छात्रों के मनोबल को तोड़ कर रख दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब 85% सवाल किसी एक ही निजी किताब से आते हैं, तो उन उम्मीदवारों को अनुचित लाभ मिलता है जिनके पास वह विशिष्ट सामग्री पहले से मौजूद थी। यह मेरिट के सिद्धांत की पूरी तरह से हत्या है।
अब सबकी निगाहें महाराष्ट्र राज्य सरकार पर टिकी हैं। क्या सरकार इस मामले की निष्पक्ष जांच कराएगी या फिर लाखों युवाओं का भविष्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगा? रोहित पवार की इस मांग ने फिलहाल राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है।
