स्वच्छ ईंधन नहीं अपनाने वाली बेकरी पर कार्रवाई, मुंबई में 102 प्रतिष्ठानों को बीएमसी का नोटिस
Mumbai Air Pollution Control Plan: मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए बीएमसी ने स्वच्छ ईंधन नहीं अपनाने वाली 102 बेकरी को काम बंद करने का नोटिस जारी किया है।
- Written By: अपूर्वा नायक
बेकरी पारंपरिक ईंधन (सौ. सोशल मीडिया )
Mumbai BMC Notice To Bakeries: शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच बीएमसी ने 15 जनवरी से अब तक 102 बेकरी को काम बंद करने का नोटिस जारी किया है, क्योंकि उन्होंने अभी तक पर्यावरण अनुकूल ईंधन का उपयोग शुरू नहीं किया है।
यह कार्रवाई पिछले वर्ष जनवरी में बॉम्बे हाई कोर्ट की तरफ से दिए गए निर्देश के बाद की गई है। अदालत ने बीएमसी को आदेश दिया था कि पारंपरिक प्रणाली पर चलने वाले सभी भोजनालयों और बेकरी को स्वच्छ ईंधन अपनाना अनिवार्य किया जाए।
बीएमसी के आंकड़ों के अनुसार, मुंबई में कुल 354 अधिकृत बेकरी पारंपरिक ईंधन जैसे जलाऊ लकड़ी का उपयोग करती थीं, जो प्रदूषण बढ़ाने में योगदान देती हैं। इनमें से 49 प्रतिशत यानी 175 बेकरी अब पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) जैसे स्वच्छ ईंधन पर स्थानांतरित हो चुकी हैं, जबकि 69 बेकरी अभी परिवर्तन की प्रक्रिया में हैं और 8 बेकरी बंद हो चुकी हैं।
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बदलाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद मिलेगी अनुमति
बीएमसी के एक अधिकारी ने बताया कि 15 जनवरी से उन 102 बेकरी को स्टॉप-वर्क नोटिस जारी किए गए हैं, जो अब भी लकड़ी जैसे पारंपरिक ईंधन का उपयोग कर रही हैं। जैसे ही वे स्वच्छ ईंधन में बदलाव की प्रक्रिया पूरी करेंगी।
बीएमसी निरीक्षण करेगी और उसके बाद उन्हें फिर से संचालन की अनुमति दी जाएगी। वर्ष 2023 में बीएमसी ने मुंबई वायु प्रदूषण को कम करने की योजना तैयार की थी, जिसमें बेकरी और भोजनालयों से निकलने वाले धुएं और उत्सर्जन को शहर में प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में से एक बताया गया था। वर्तमान में मुंबई के कुल वायु प्रदूषण में बेकरी का योगदान लगभग 6 प्रतिशत है।
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कार्बन-गहन ईंधन उपयोग करने वाली बेकरी
- अधिकारियों के अनुसार, यह प्रतिशत भले ही ज्यादा न लगे, लेकिन अधिकांश बेकरी भायखला, मझगांव, मालाड और साताक्रूज जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में स्थित है, जिससे उनका प्रदूषण प्रभाव अधिक खतरनाक हो जाता है।
- वर्ष 2024 में किए गए एक सर्वे के अनुसार, मुंबई की 216 बेकरी में से 47 प्रतिशत यानी लगभग 100 बेकरी लकड़ी और कबाड़ जैसे कार्बन-गहन ईंधन का उपयोग करती है, जिससे हवा में पीएम 2।5 कणों का स्तर बढ़ता है।
