मुंबई में श्मशान घाटों से बढ़ते प्रदूषण पर सवाल, वायु गुणवत्ता जांच मशीन लगाने की मांग

Mumbai AQI: मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच श्मशान घाटों में जलाऊ लकड़ी से निकलने वाले धुएं को लेकर चिंता बढ़ी है। कांग्रेस नगरसेविका ने सभी श्मशान घाटों के बाहर AQI मशीन लगाने की मांग उठाई है।
Mumbai Crematorium
मुंबई श्मशान घाट में एयर पॉल्यूशन का मुद्दा (सौ. सोशल मीडिया )
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Mumbai Creatorium Air Pollution: मुंबई में बड़े पैमाने पर चल रहे विकास कार्यों के कारण वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। इसे देखते हुए मनपा ने हर निर्माण स्थल पर वायु गुणवत्ता जांच मशीन लगाना अनिवार्य कर दिया है। हालांकि हिंदू श्मशान घाटों में बड़ी मात्रा में जलाऊ लकड़ी का उपयोग होने के कारण वहां भी प्रदूषण हो रहा है।

इस ओर प्रशासन का ध्यान नहीं जा रहा है। इसलिए ऐसे श्मशान भूमि के बाहर वायु गुणवत्ता जांच मशीन लगाने की मांग कांग्रेस की नगरसेविका तुलिप मिरांडा ने की। मुंबई मनपा क्षेत्र में स्थित मनपा और निजी हिंदू श्मशान भूमि में जलाऊ लकड़ी की मुफ्त आपूर्ति के लिए किए गए ठेके की अवधि में बदलाव के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान नगरसेविका तुलिप मिरांडा ने जलाऊ लकड़ी से होने वाले प्रदूषण का मुद्दा उठाया।

इस पर स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने इस विषय पर विचार करने का सुझाव दिया। बता दें कि शहर में कुल 70 हिंदू श्मशान घाट हैं, जिनमें से 52 मनपा और 18 निजी हैं। इन सभी श्मशान घाटों में 1 अगस्त 2008 से मनपा द्वारा जलाऊ लकड़ी की मुफ्त आपूर्ति की जा रही है।

इसके अलावा बीएमसी तथा निजी मुस्लिम कब्रिस्तानों में दफन के लिए इस्तेमाल होने वाली लकड़ी की पट्टियों की भी मुफ्त आपूर्ति की जाती है। जलाऊ लकड़ी के अपव्यय और प्रदूषण को कम करने के लिए सस्ते ईंधन के विकल्प के रूप में मनपा की नीति के तहत कुछ श्मशान घाटों में पारंपरिक लकड़ी की चिताओं को बनाए रखते हुए विद्युत दाहिनी और गैस दाहिनी भट्टियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्तमान में 10 श्मशान घाटों में विद्युत दाहिनी और 18 श्मशान घाटों में गैस शवदाहिनी स्थापित की गई हैं।

हर श्मशान में एक इलेक्ट्रिक दाह संस्कार की हो व्यवस्था

बीएमसी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वायु प्रदूषण को नियंत्रण में करने के लिए बीएमसी विभिन्न प्रयास कर रही है। इसी में से एक प्रयास यह है जिसमें हर श्मशान में कम से कम एक इलेक्ट्रिक दाह संस्कार की व्यवस्था होना चाहिए, जिससे वहां आने वाले व्यक्तियों के पास शव के दाह संस्कार की प्रक्रिया के लिए पारंपरिक (लकड़ी से शव को जलाना) व इलेक्ट्रिक दोनों का विकल्प मौजूद रहे।

बता दें कि इलेक्ट्रिक प्रक्रिया के तहत एक बंद, अग्निरोधी ईंटों से बनी भट्टी का उपयोग किया जाता है, जिसमें शव को रखा जाता है। भट्टी को एक निश्चित उच्च तापमान (जैसे 1500 से 2000 डिग्री सेल्सियस) तक गरम किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में कुछ मिनटों का समय लगता है, जो शव के आकार पर निर्भर करता है।

ब्रिकेट्स बायोमास का उपयोग

मृतदेह के दाह संस्कार के लिए लकड़ी के विकल्प के रूप में ब्रिकेट्स बायोमास के उपयोग के लिए प्रयोगात्मक तौर पर 14 श्मशान घाटों का चयन किया गया है, ताकि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना वायु प्रदूषण को भी कम किया जा सके, ऐसा पालिका प्रशासन ने बताया। ये कम धुआं उत्पन्न करते हैं और कोयले की तुलना में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन बहुत कम करते हैं, जिससे यह एक हरित ईंधन है।

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