मुंबई में जल संकट की आशंका, बीएमसी अब करेगी 18 हजार कुओं के पुनर्जीवन की तैयारी
BMC Well Revival Monsoon Preparedness Plan: मुंबई को पानी उपलब्ध कराने वाले बांधों में जल भंडार कम होने और मानसून में देरी की आशंका के बीच बीएमसी ने शहर के कुओं के पुनर्जीवन की योजना बनाई है।
- Written By: अपूर्वा नायक
BMC वेल रिवाइवल प्रोजेक्ट (सौ. सोशल मीडिया )
BMC Well Revival Monsoon Preparedness Plan News: बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े ने शहर में जल प्रबंधन, सड़क रखरखाव, यातायात व्यवस्था और मानसून पूर्व तैयारियों को लेकर अधिकारियों के साथ गुरूवार को बैठक की।
उन्होंने कहा कि मुंबई को पानी उपलब्ध कराने वाले बांधों में जल संग्रहण कम हुआ है और मौसम विभाग ने भी मानसून के देर से आने की संभावना जताई है। इसलिए कुओं को पुनर्जीवित किया जाएगा।
बता दें कि शहर में पानी की मांग दिन- प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। मौजूदा समय में शहर के लोगों को 4600 एमएलडी से अधिक पानी की आवश्यकता है, लेकिन विभिन्न कारणों से केवल 4 हजार एमएलडी के आसपास हो पानी की सप्लाई प्रतिदिन की जाती है।
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जल संचय जैसे प्लान नहीं कर पाई है लागू
इस वर्ष अल नीनो की वजह से बारिश देरी से होने की संभावना है और औसत से कम बारिश हो सकती है। बीएमसी ने पहले ही 10 प्रतिशत की यानी की कटौती लागू कर दी है। टैंकर एसोसिएशन के हड़ताल से राज्य सरकार भी बैकफुट पर आ गई थी। हालात बिगड़ता देख एक बार फिर बीएमसी ने अपने झोले में से पुराना झुनझुना लेकर बजाया है।
बीएमसी का कहना है कि अब शहर की सभी सार्वजनिक, सरकारी और निजी कुओं का सर्वेक्षण कर उनका पुनर्जीवन किया जाए तथा वर्षा जल संचयन और रिचार्ज की व्यवस्था विकसित की जाए सवाल यह है कि आखिर कुओं के पुनर्जीवन का फैसला पहले क्यों नहीं लिया गया?
बीएमसी किस मुहूर्त का इंतजार कर रही थी। हर वर्ष गर्मी में जल संकट उत्पन्न होने के बाद ही बीएमसी बैठक क्यों करती है? गौरतलब है कि वर्षा जल संचयन जैसे प्लान बीएमसी अब तक लागू नहीं कर पाई है। कई वर्षों से सिर्फ मुंबईकरों को लॉलीपॉप पकड़ाया जा रहा है। बता दें कि मुंबई में 18 हजार से अधिक कुआं है, गर्मियों में पानी की कमी की वजह से अवैध तरीके से कुओं से पानी निकाले जाने की शिकायतें भी सामने आती है। कुओं से पानी निकालने के लिए संबंधित व्यक्ति को बीएमसी से एनओसी लेना पड़ता है।
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गड्डों की शिकायतें 24 घंटे में सुलझाने के निर्देश
आयुक्त ने निर्देश दिया कि गड्ढों से संबंधित शिकायतों का 24 घंटे के भीतर निपटारा किया जाए। साथ ही जिन सड़कों का कांक्रीटीकरण कार्य पूरा हो चुका है, वहां से मलबा, निर्माण सामग्री और बैरिकेड तत्काल हटाए जाएं। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान भी नालों की सफाई का कार्य लगातार जारी रहना चाहिए।
