Compensation vs Fine in Mulund Metro Accident (फोटो क्रेडिट-X)
Mulund Metro Accident Compensation Controversy: मुंबई के मुलुंड इलाके में मेट्रो निर्माण के दौरान हुए दर्दनाक हादसे ने सोशल मीडिया पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। इस हादसे में MMRDA (मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण) द्वारा ठेकेदारों पर लगाए गए भारी जुर्माने और मृतक के परिवार को दिए जाने वाले मुआवजे की राशि के बीच के भारी अंतर को लेकर लोग सवाल उठा रहे हैं। जहाँ एक ओर लापरवाही के लिए कंपनियों पर 6 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है, वहीं एक मानव जीवन की कीमत केवल 5 लाख रुपये आंकी गई है।
नेटीजेंस इस असमानता को “अन्यायपूर्ण” और “कॉर्पोरेट हितों को प्राथमिकता” देने वाला बता रहे हैं।
Contractors fined Rs.6 crore
And the person who died received only Rs.5 lakhs Shouldn’t the whole Rs.6 crore be given to the deceased and injured??@ndtv@ShivAroor@RajatSharmaLive@narendramodi#Metro#MulundAccidenthttps://t.co/GSnh1tRXwb — Fundamental Politics (@StockMarketTyms) February 15, 2026
14 फरवरी 2026 को मुलुंड के एलबीएस मार्ग पर मेट्रो लाइन-4 का एक भारी स्लैब (पैरापेट सेगमेंट) चलती ऑटो और कार पर गिर गया था। इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए MMRDA ने सख्त रुख अपनाया है:
ठेकेदार पर गाज: मुख्य ठेकेदार RAJV-मिल्लन इंफ्रा पर 5 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया गया है।
कंसल्टेंट पर कार्रवाई: प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (DB-Hill-LBG कंसोर्टियम) पर भी 1 करोड़ रुपये का दंड लगाया गया है।
निलंबन और गिरफ्तारी: एक कार्यकारी अभियंता को निलंबित कर दिया गया है और फर्मों के पांच वरिष्ठ अधिकारियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस हादसे में जान गंवाने वाले रामधन यादव के परिजनों के लिए 5 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है। इसी बात ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है:
असमानता का तर्क: लोग सवाल कर रहे हैं कि जब सरकार लापरवाही को इतना गंभीर मानती है कि 6 करोड़ का जुर्माना वसूल रही है, तो पीड़ित परिवार को मिलने वाली मदद इतनी कम क्यों है?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला: कई यूजर्स ने सुप्रीम कोर्ट के उन फैसलों का हवाला दिया है जहाँ सीवर सफाई जैसे हादसों में मौत पर 30 लाख रुपये तक के मुआवजे का प्रावधान है।
नेताओं की प्रतिक्रिया: विपक्ष के नेताओं, विशेषकर आदित्य ठाकरे ने सुरक्षा मानकों पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि क्या केवल जुर्माना लगा देना काफी है या ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा?
मुलुंड हादसे के बाद मुलुंड के विधायक मिहिर कोटेचा ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि उक्त ठेकेदार द्वारा पहले भी 54 बार सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किया गया था, जिसे नजरअंदाज किया गया।
जांच समिति: बसवराज एम. भद्रगोंड के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है जो निर्माण पद्धति और गुणवत्ता नियंत्रण की जांच करेगी।
जनता की मांग: सोशल मीडिया पर ‘मुंबई मेट्रो सेफ्टी’ ट्रेंड कर रहा है, जहाँ नागरिक मुआवजे की राशि बढ़ाने और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की मांग कर रहे हैं।