RSS centenary event Mumbai (सोर्सः सोशल मीडीया)
RSS Centenary Event Mumbai: आठ फरवरी (भाषा)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का निर्माण सभी को विश्वास में लेकर किया जाना चाहिए और इससे समाज में मतभेद नहीं पैदा होने चाहिए।
मुंबई में आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए भागवत ने कहा कि उत्तराखंड में यूसीसी को लेकर तीन लाख सुझाव प्राप्त हुए और सभी हितधारकों से चर्चा के बाद अधिनियम पारित किया गया। उन्होंने कहा, “यूसीसी का निर्माण आम सहमति से किया जाना चाहिए। इससे किसी भी प्रकार के मतभेद पैदा नहीं होने चाहिए।”
एक सवाल के जवाब में भागवत ने कहा कि समाज में बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक जैसा कोई भेद नहीं है, “हम सब एक ही समाज का हिस्सा हैं।” उन्होंने मुस्लिम और ईसाई समुदाय के लोगों के साथ विश्वास, मित्रता और संवाद बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। भागवत ने कहा, “इस्लाम को शांति का धर्म कहा जाता है, लेकिन शांति दिखाई नहीं देती। यदि धर्म में आध्यात्मिकता न हो, तो वह प्रभुत्वशाली और आक्रामक हो जाता है।
आज इस्लाम और ईसाई धर्म में जो कुछ दिखाई देता है, वह ईसा मसीह और पैगंबर मोहम्मद की शिक्षाओं के अनुरूप नहीं है। हमें वास्तविक इस्लाम और ईसाई धर्म के अनुसरण की आवश्यकता है।” भारत-अमेरिका के हालिया अंतरिम व्यापार समझौते पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी विस्तृत जानकारी नहीं है, लेकिन यह जरूरी है कि ऐसे सौदे दोनों देशों के लिए लाभकारी हों और भारत को नुकसान न हो।
इस दौरान उन्होंने कहा कि आरएसएस के लिए “अच्छे दिन” भाजपा के सत्ता में आने से नहीं आए, बल्कि संघ की वैचारिक प्रतिबद्धता और स्वयंसेवकों की मेहनत के कारण आए। उन्होंने यह भी कहा कि संघ अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए लंबे समय से प्रतिबद्ध रहा है और उसका समर्थन करने वालों को इसका लाभ मिला। हिंदुत्व विचारक वीर सावरकर को ‘भारत रत्न’ दिए जाने की मांग पर भागवत ने कहा कि यदि उन्हें यह सम्मान दिया जाता है, तो इससे उस सम्मान की प्रतिष्ठा और बढ़ेगी। कार्यक्रम में रवीना टंडन, विकी कौशल, अनन्या पांडे, करण जौहर, मधुर भंडारकर, रमेश तौरानी और पंडित हृदयनाथ मंगेशकर सहित कई फिल्मी हस्तियां मौजूद थीं।
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भागवत ने कहा कि आरएसएस जरूरत पड़ने पर सलाह देता है और राजनीतिक दबाव मतदाताओं की ओर से आता है, संघ की ओर से नहीं। वामपंथी दलों के जनाधार पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि आरएसएस उन्हें मार्गदर्शन दे सकता है, बशर्ते वे इसकी मांग करें। उन्होंने बताया कि आरएसएस एक युवा संगठन है, जिसके कार्यकर्ताओं की औसत आयु लगभग 28 वर्ष है और इसे घटाकर 25 वर्ष करने का प्रयास किया जा रहा है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)