Budget 2026: आम जनता के साथ विश्वासघात और कॉरपोरेट की चांदी, वामपंथी दलों ने केंद्र सरकार को घेरा

Left Parties on Budget: वामपंथी दलों ने बजट को जन-विरोधी और पूंजीपतियों का हितैषी करार दिया है। माकपा और भाकपा ने दावा किया कि सरकार ने शिक्षा और कृषि जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के बजट में कटौती की है।
left parties reaction on budget 2026
बजट 2026, (कॉन्सेप्ट फोटो)
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Union Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 पर वामपंथी दलों ने कड़ा प्रहार किया है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक जैसे दलों ने एक सुर में इस बजट को "जन-विरोधी" और "संघीय ढांचे के खिलाफ" करार दिया है। वामपंथी नेताओं का आरोप है कि केंद्र सरकार ने आम लोगों की बुनियादी जरूरतों को दरकिनार कर केवल बड़े कारोबारी घरानों के हितों को प्राथमिकता दी है।

माकपा (CPI-M) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर उन योजनाओं की सूची साझा की है जिनमें 2025-26 की तुलना में खर्च में कटौती की गई है। पार्टी के अनुसार, निम्नलिखित महत्वपूर्ण योजनाओं के आवंटन में कमी आई है।

  • कृषि एवं ग्रामीण विकास: राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और फसल बीमा योजना।
  • शिक्षा एवं पोषण: पीएम पोषण (मिड-डे मील) और पीएम-श्री (PM-SHRI) स्कूल योजना।
  • स्वास्थ्य एवं आवास: प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) और प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण और शहरी दोनों)।
  • सामाजिक सुरक्षा: अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और पूर्वोत्तर क्षेत्रों के कल्याण के लिए निर्धारित फंड।

"अमीर और अमीर, गरीब और गरीब"

भाकपा (CPI) के सांसद पी संदोष कुमार ने बजट पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह बजट शक्ति और संसाधनों को कुछ हाथों में केंद्रित करने का एक उपकरण मात्र है। उन्होंने कहा, "जब देश की जनता गिरती आय, भयंकर बेरोजगारी और आर्थिक अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है, तब सरकार ने सार्वजनिक खर्च बढ़ाने या मांग पैदा करने का कोई गंभीर प्रयास नहीं किया।" उन्होंने दावा किया कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मौलिक क्षेत्रों की उपेक्षा कर सरकार ने लोगों की कठिनाइयों से मुंह मोड़ लिया है।

युवाओं, महिलाओं और किसानों की उपेक्षा

भाकपा (माले) लिबरेशन ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि बजट 2026-27 में मजदूरों और युवाओं के लिए कोई ठोस योजना नहीं है। बढ़ती महंगाई के बीच लोगों की आमदनी ठहरी हुई है, जिससे जीवनयापन की लागत बढ़ती जा रही है। पार्टी के अनुसार, यह बजट इस तनावपूर्ण आर्थिक माहौल को सुधारने में पूरी तरह विफल रहा है।

संघीय ढांचे पर प्रहार और कॉरपोरेट प्रेम

ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक ने इस बजट को "जनता के साथ विश्वासघात" बताया है। वाम दलों का मानना है कि राज्यों के अधिकारों और उनके वित्तीय संसाधनों को सीमित कर केंद्र सरकार संघीय ढांचे को कमजोर कर रही है। माकपा ने आरोप लगाया कि बजट का पूरा बोझ मेहनतकश लोगों और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों पर डाला गया है, जबकि बड़े कॉरपोरेट घरानों को करों और अन्य माध्यमों से लाभ पहुंचाया जा रहा है।

कुल मिलाकर, वामपंथी दलों ने इस बजट 2026 को आर्थिक असमानता बढ़ाने वाला दस्तावेज करार दिया है, जो उनके अनुसार भारत की व्यापक राष्ट्रीय आर्थिक जरूरतों के खिलाफ है।

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