Neelam Gorhe vs Sheetal Mhatre MLC Candidate (फोटो क्रेडिट-X)
Neelam Gorhe vs Sheetal Mhatre MLC Candidate: महाराष्ट्र विधान परिषद के नौ सदस्यों का कार्यकाल मई 2024 में समाप्त होने के साथ ही राज्य की राजनीति में नए समीकरणों और चेहरों को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है। इस विदाई सूची में शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे समेत नीलम गोरहे, शशिकांत शिंदे और अमोल मिटकरी जैसे दिग्गज शामिल हैं। हालांकि, सबसे अधिक चर्चा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना को लेकर है। सवाल यह है कि शिंदे खेमा इस बार विधान परिषद (MLC) की सीट के लिए किस महिला चेहरे पर दांव लगाएगा? सोशल मीडिया पर नीलम गोरहे और शीतल म्हात्रे के नामों को लेकर बहस छिड़ी हुई है।
हाल ही में संपन्न हुए बजट सत्र में विदाई भाषण के दौरान एक दिलचस्प वाकया सामने आया। जहाँ एनसीपी के अमोल मिटकरी ने उद्धव ठाकरे और अजीत पवार के प्रति आभार व्यक्त किया, वहीं नीलम गोरहे ने उद्धव ठाकरे का उल्लेख तक नहीं किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह रणनीतिक चुप्पी अगले कार्यकाल की दावेदारी को मजबूत करने की एक कोशिश हो सकती है।
नीलम गोरहे साल 2002 से लगातार विधान परिषद की सदस्य रही हैं और वर्तमान में सदन की उपसभापति (Deputy Chairperson) के पद पर आसीन हैं। जुलाई 2023 में उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर शिंदे खेमे में शामिल होने वाली गोरहे का राजनीतिक कद काफी बड़ा है। वह राज्य की पहली महिला उपसभापति हैं और निर्विरोध चुनी गई थीं। चर्चा है कि उनके अनुभव और महिला आधार को देखते हुए मुख्यमंत्री शिंदे उन्हें एक और कार्यकाल दे सकते हैं। हालांकि, उद्धव ठाकरे का आभार न जताने पर उन्हें सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना भी करना पड़ रहा है, जिसे कई लोग शिंदे के प्रति उनकी वफादारी के प्रमाण के रूप में देख रहे हैं।
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शिवसेना की तेजतर्रार प्रवक्ता और पूर्व पार्षद (Corporator) शीतल म्हात्रे का नाम भी विधान परिषद की रेस में मजबूती से उभर रहा है। म्हात्रे को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का बेहद करीबी माना जाता है और वह टीवी डिबेट्स से लेकर सोशल मीडिया तक विपक्षी दलों, विशेषकर उद्धव गुट पर हमलावर रहने के लिए जानी जाती हैं। पार्टी के भीतर एक बड़े वर्ग का मानना है कि म्हात्रे जैसी आक्रामक नेता को ऊपरी सदन में भेजकर पार्टी अपनी आवाज और बुलंद कर सकती है। चूँकि शिंदे ने राज्यसभा चुनावों में ज्योति वाघमारे को भेजकर सबको चौंकाया था, इसलिए शीतल म्हात्रे के नाम की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
विधान परिषद की खाली हो रही सीटों पर केवल शिवसेना ही नहीं, बल्कि महायुति के अन्य सहयोगी दलों की भी नजर है। हाल ही में भाजपा से शिवसेना में शामिल हुईं शाइना एनसी, संजय निरुपम और राहुल शेवाले जैसे नाम भी चर्चा में रहे हैं। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के सामने चुनौती यह है कि वे अनुभवी नीलम गोरहे को बरकरार रखते हैं या शीतल म्हात्रे जैसे युवा और आक्रामक चेहरे को मौका देकर भविष्य की राजनीति का संकेत देते हैं। मई में होने वाले इन चुनावों के चयन से यह साफ हो जाएगा कि आगामी विधानसभा चुनावों के लिए शिंदे की रणनीति क्या रहने वाली है।