Mumbai Metro Aqua Line Mobile Network (फोटो क्रेडिट-X)
Milind Deora On Mobile Network in Metro: मुंबई की लाइफ लाइन कही जाने वाली मेट्रो की एक्वा लाइन (Aqua Line) में सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक बड़ी समस्या सामने आई है। शिवसेना के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद मिलिंद देवड़ा ने भूमिगत मेट्रो रूट पर मोबाइल नेटवर्क और वाई-फाई कनेक्टिविटी की भारी कमी को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। देवड़ा ने इस संबंध में मुंबई मेट्रो रेल निगम (MMRCL) की प्रबंध निदेशक अश्विनी भिडे को एक औपचारिक पत्र लिखकर तत्काल तकनीकी समाधान की मांग की है।
सांसद ने जोर देकर कहा कि देश की आर्थिक राजधानी में डिजिटल कनेक्टिविटी का अभाव न केवल असुविधाजनक है, बल्कि यह शहर की उत्पादकता को भी प्रभावित कर रहा है।
मिलिंद देवड़ा, जो खुद इस रूट के नियमित यात्री हैं, ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि मेट्रो के भूमिगत हिस्सों में नेटवर्क पूरी तरह गायब हो जाता है। उन्होंने कहा, “मुंबई जैसे शहर में, जहाँ हजारों पेशेवर और उद्यमी हर मिनट का उपयोग समन्वय के लिए करते हैं, वहां यात्रा के दौरान ‘ऑफलाइन’ रहना उनकी कार्यक्षमता में बड़ी बाधा है।” डिजिटल युग में निर्बाध संचार को उन्होंने एक बुनियादी आवश्यकता बताया और कहा कि नेटवर्क की अनुपलब्धता आपातकालीन स्थितियों में सुरक्षा के लिहाज से भी जोखिम भरी साबित हो सकती है।
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सांसद ने पत्र में हालिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए बताया कि प्रमुख टेलीकॉम ऑपरेटर इन-ट्रेन और अंडरग्राउंड कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए तैयार हैं, बशर्ते उन्हें एमएमआरसीएल से आवश्यक मंजूरी और तकनीकी समन्वय मिले। उन्होंने अश्विनी भिडे से अपील की कि सभी संबंधित पक्षों के साथ मिलकर एक सुव्यवस्थित ढांचा तैयार किया जाए ताकि यात्रियों को सुरंगों के भीतर भी हाई-स्पीड इंटरनेट मिल सके। मिलिंद देवड़ा ने सुझाव दिया कि जब तक मोबाइल टावर का काम पूरा नहीं होता, तब तक स्टेशनों पर फ्री हाई-स्पीड वाई-फाई की सुविधा दी जानी चाहिए।
अपने पत्र के समापन में शिवसेना सांसद ने याद दिलाया कि मुंबई हमेशा से अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और नवाचार (Innovation) में देश का नेतृत्व करता रहा है। उन्होंने कहा कि एक्वा लाइन जैसी विश्व स्तरीय मेट्रो परियोजना में डिजिटल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना न केवल यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाएगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर मुंबई की छवि को और मजबूत करेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन इस मुद्दे को प्राथमिकता देगा और जल्द ही यात्रियों को “नो सिग्नल” की समस्या से मुक्ति मिलेगी।