महिला होने के कारण पद से वंचित, IAS Manisha Mhaiskar के खुलासे से मचा हड़कंप
महाराष्ट्र की वरिष्ठ IAS Manisha Mhaiskar ने खुलासा किया है कि एक मंत्री ने उन्हें केवल महिला होने के कारण विभाग में नियुक्त करने से मना कर दिया। इस बयान से राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
- Written By: अपूर्वा नायक
महाराष्ट्र की अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा म्हैसकर (सौ. सोशल मीडिया )
Manisha Mhaiskar Gender Bias Maharashtra: महाराष्ट्र की अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा म्हैसकर के एक हालिया खुलासे ने राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
दिल्ली में आयोजित महिला अधिकारियों के एक सम्मेलन के दौरान प्रकाशित स्मारिका में उन्होंने अपने करियर का एक कड़वा अनुभव साझा किया है।म्हैसकर ने दावा किया है कि एक मौजूदा मंत्री ने उन्हें केवल इसलिए अपने विभाग में नियुक्त करने से मना कर दिया क्योंकि वह एक महिला हैं।
मनीषा म्हैसकर ने अपने लेख में स्पष्ट किया कि उनके लगभग 33 वर्षों के कार्यकाल में उन्होंने कई चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं, लेकिन एक बार ऐसा भी हुआ जब उन्हें सिर्फ ‘स्त्री’ होने के कारण नकारा गया।
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उन्होंने बताया कि साल 2023 में जब राज्य में नई सरकार के गठन के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले और नियुक्तियां हो रही थीं, तब एक मंत्री ने स्पष्ट रुख अपनाया कि उन्हें अपने विभाग के लिए महिला सचिव नहीं चाहिए। चौंकाने वाली बात यह है कि उस मंत्री ने IAS Manisha Mhaiskar की कार्यक्षमता या योग्यता पर कोई सवाल नहीं उठाया था, बल्कि उनका विरोध केवल उनके महिला होने को लेकर था।
Manisha Mhaiskar के बयान से राजनीतिक गलियारों में बढ़ा तनाव
वैसे म्हैसकर ने अपने लेख में किसी विशिष्ट मंत्री के नाम का उल्लेख नहीं किया है, लेकिन ‘2023 की सरकार के संदर्भ ने राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। इस बयान के बाद महायुति गठबंधन के मंत्रियों की और संदेह की सुइयां घूमने लगी है। मंत्रालयी हलकों में अब इस बात पर चर्चा गर्म है कि आखिर वह ‘शक्तिशाली’ मंत्री कौन है जिसे महिला अधिकारी के साथ काम करने में आपत्ति थी।
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प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने उच्च पदों पर कार्यरत महिला अधिकारियों के सामने आने वाली पितृसत्तात्मक चुनौतियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। म्हैसकर का यह अनुभव दर्शाता है कि आज के आधुनिक युग में भी, जहां महिलाएं हर क्षेत्र में नेतृत्व कर रही है, प्रशासनिक व्यवस्था के शीर्ष स्तर पर अभी भी लैंगिक पूर्वाग्रह की जड़ें काफी गहरी हैं। इस खुलासे के बाद अब विपक्ष भी सरकार को घेरने की तैयारी में है, जिससे आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है।
