महाराष्ट्र मांसाहारी हैं; बकरीद की कुर्बानी पर चल रहें विवाद पर संजय राउत ने ऐसा क्यों कहा?
Sanjay Raut News: संजय राउत ने बकरीद पर कुर्बानी विवाद को राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा कि महाराष्ट्र एक मांसाहारी समाज है। उन्होंने कामाख्या देवी का उदाहरण देकर धर्म की राजनीति पर तीखा प्रहार किया।
- Written By: गोरक्ष पोफली
संजय राउत (सोर्स: सोशल मीडिया)
Sanjay Raut On Qurbani Controversy: महाराष्ट्र की वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक स्थिति, विशेषकर धार्मिक राजनीति और बकरीद पर कुर्बानी की परंपरा पर संजय राउत ने एक तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संजय राउत का आरोप है कि सरकार और बीएमसी जानबूझकर धर्म की राजनीति कर रहे हैं ताकि समाज में विभाजन पैदा किया जा सके।
उनके अनुसार, आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए जानबूझकर तनाव का माहौल बनाया जा रहा है, जिससे दो समुदायों के बीच दंगे जैसी स्थिति उत्पन्न होने का खतरा है।
कुछ की कुर्बानी स्वीकार तो कुछ पर सवाल क्यों?
कुर्बानी के विषय पर मीडिया से बोलते हुए, संजय राउत ने धार्मिक अनुष्ठानों में दी जाने वाली पशु बलि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कामाख्या देवी मंदिर का उदाहरण देते हुए तर्क दिया कि वहां भी बड़ी संख्या में भैंसों की बलि दी जाती है। उनका मुख्य विरोध इस बात पर है कि समाज और राजनीति का एक हिस्सा कुछ प्रकार की कुर्बानियों को तो स्वीकार करता है, लेकिन दूसरों की कुर्बानी पर सवाल उठाता है।
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#WATCH | Mumbai | Shiv Sena (UBT) MP Sanjay Raut says, “…As for those who are speaking about ‘sacrifice’ (Qurbani): how many sacrifices were made at the Kamakhya Temple?…Maharashtra is a land of meat-eaters, the land of Chhatrapati Shivaji Maharaj. We are Kshatriyas; we are… pic.twitter.com/t1FwdyEeMG — ANI (@ANI) May 28, 2026
महाराष्ट्र एक मांसाहारी समाज
संजय राउत ने अपनी बात को क्षेत्रीय और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हुए कहा कि महाराष्ट्र छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमि है और वे स्वयं को क्षत्रिय और मराठा पहचान से जोड़ते हैं। उनके अनुसार, महाराष्ट्र एक मांसाहारी समाज है और कुर्बानी देना उनकी सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा रहा है, जिसे वे जारी रखेंगे।
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कुर्बानी और बलिदान का संबंध
अंत में, संजय राउत ने कुर्बानी शब्द के अर्थ को व्यापक बनाते हुए इसे देशभक्ति और राष्ट्र रक्षा से जोड़ा है। धार्मिक त्योहारों या रावाजों को अलग मोड देते हुए राउत ने आगे कहा कि, बलिदान देश के अस्तित्व के लिए भी आवश्यक है। उनका तर्क है कि यदि लोग देश और राज्य के लिए बलिदान देना बंद कर देंगे, तो महाराष्ट्र और भारत को बचा पाना असंभव होगा। कुल मिलाकर, संजय राउत धार्मिक प्रथाओं को राजनीतिक चश्मे से देखने का विरोध करते है और इसे मराठा पहचान तथा राष्ट्रवाद के एक अभिन्न अंग के रूप में प्रस्तुत करते है।
