ईमानदार उपभोक्ताओं पर भारी पड़ी महावितरण की ढिलाई; 15% बिजली चोरी से ग्राहकों को लगी वार्षिक 800 करोड़ की चपत
Mahavitaran Electricity Theft Tariff Customers: महावितरण में 15% से अधिक बिजली चोरी से 800 करोड़ का नुकसान। नियमित बिल भरने वाले ईमानदार ग्राहकों पर डाला जा रहा अतिरिक्त टैरिफ का बोझ।
- Written By: अनिल सिंह
महावितरण के 25 हजार मिलियन यूनिट बिजली नुकसान से भड़के उपभोक्ता (प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स-AI)
Mahavitaran Power Theft Loss: महाराष्ट्र में बढ़ती तपिश और भीषण गर्मी के बीच जहां एक तरफ आम नागरिक भारी-भरकम बिजली बिलों से परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ महावितरण की आंतरिक व्यवस्था में जारी बड़ी सेंधमारी ने उपभोक्ताओं की नाराजगी को और बढ़ा दिया है। राज्य की बिजली वितरण व्यवस्था में हो रही यह ‘गळती’ केवल एक तकनीकी समस्या नहीं है, बल्कि इसके पीछे संगठित बिजली चोरी और दशकों पुराने जर्जर बुनियादी ढांचे (Infrastructure) की बड़ी नाकामी छिपी हुई है।
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, बिजली जब पावर प्लांट से निकलकर ग्रिड के जरिए सब-स्टेशनों और फिर घरों तक पहुंचती है, तो तारों के प्रतिरोध के कारण कुछ बिजली का स्वाभाविक नुकसान होता है जिसे ‘ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन लॉस’ कहा जाता है। विद्युत आयोग ने इसके लिए 12 प्रतिशत की एक तार्किक सीमा तय की थी। लेकिन महावितरण के लचर प्रबंधन के कारण यह आंकड़ा 15 फीसदी को भी पार कर गया है। सीधे शब्दों में कहें तो उत्पादित होने वाली बिजली का एक बहुत बड़ा हिस्सा उपभोक्ताओं के मीटर तक पहुंचने से पहले ही हवा में गायब हो रहा है या चोरी कर लिया जा रहा है।
नुकसान के 3 प्रमुख कारण
अवैध हुकिंग और चोरी: महाराष्ट्र के कई ग्रामीण इलाकों और शहरी झुग्गी-झोपड़ियों (Slums) में आज भी सीधे मुख्य बिजली के तारों पर ‘कुकड़ा’ या अवैध हुक डालकर धड़ल्ले से बिजली चोरी की जा रही है, जिस पर स्थानीय उड़नदस्ते लगाम कसने में नाकाम रहे हैं।
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जर्जर ट्रांसफॉर्मर और पुरानी तारें: राज्य के वितरण नेटवर्क में लगे अधिकांश ट्रांसफॉर्मर अपनी तय क्षमता से अधिक का लोड उठा रहे हैं। पुरानी पड़ चुकी तारों और ओवरलोडिंग के कारण बड़े पैमाने पर तकनीकी खराबी होती है, जिससे बिजली की बर्बादी बढ़ जाती है।
कृषि पंपों का अनियंत्रित उपयोग: खेतों में फसलों की सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाले कृषि पंपों की हॉर्सपावर (HP) क्षमता और उनके वास्तविक बिजली उपभोग में भारी अंतर पाया गया है। कई जगहों पर बिना वैध कनेक्शन के भी अवैध रूप से भारी मोटरें चलाई जा रही हैं।
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कैसे होती है आम जनता के बजट की ‘चोरी’?
महावितरण को होने वाले इस सालाना 800 करोड़ रुपये के वित्तीय नुकसान का सीधा असर आम नौकरीपेशा और मध्यमवर्गीय परिवारों के मासिक बजट पर पड़ता है। जब महावितरण वित्तीय संकट में घिरती है, तो वह विद्युत नियामक आयोग के समक्ष घाटे की दुहाई देकर प्रति यूनिट बिजली दरों को बढ़ाने की याचिका (Tariff Petition) दायर कर देती है। आयोग से मंजूरी मिलते ही बढ़ी हुई दरें लागू कर दी जाती हैं। इसके परिणामस्वरूप, जो ईमानदार नागरिक समय पर ईमानदारी से बिल चुकाते हैं, उन्हें उन लोगों की बिजली का बिल भी अप्रत्यक्ष रूप से भरना पड़ता है जो बिजली की चोरी कर रहे हैं।
आधिकारिक वेबसाइट पर दर्ज कराएं शिकायत
इस पूरे मामले पर विभिन्न ग्राहक सोसायटियों और उपभोक्ता मंचों ने महावितरण के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्राहकों की मांग है कि बिजली चोरी करने वालों पर सीधे फौजदारी मुकदमे दर्ज किए जाएं और ईमानदार उपभोक्ताओं को दर बढ़ोतरी से राहत दी जाए। यदि आपको भी अपने बिजली बिल में किसी भी तरह की विसंगति दिखती है, या आप अपने इलाके की वर्तमान बिजली दरों (Tariff Rates) की जांच करना चाहते हैं, तो आप सीधे महावितरण की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपनी ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
