भाजपा विधायक रवींद्र चव्हाण का फर्जी लेटरहेड बनाकर ठेकेदारों से वसूली की साजिश, जानें कैसे खुला राज

BJP MLA Ravindra Chavan Fake Letterhead Extortion Case: भाजपा विधायक रवींद्र चव्हाण के फर्जी लेटरहेड और जाली दस्तखत के जरिए ठेकेदारों से वसूली की कोशिश। मुंबई में मामला दर्ज, जांच शुरू।
Ravindra Chavan Fake Letterhead
मुंबई में बीजेपी विधायक के जाली दस्तखत कर ठेकेदारों को धमकाया (फोटो क्रेडिट-X)
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Ravindra Chavan Fake Letterhead: मुंबई में सरकारी ठेकों और टेंडरों से जुड़े ठेकेदारों को निशाना बनाने के लिए जालसाजों द्वारा राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल करने का यह एक बेहद शातिर मामला है। अन्न एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में अचानक एक शिकायती पत्र पहुंचा, जिस पर भाजपा विधायक रवींद्र चव्हाण के नाम का लेटरहेड और नीचे उनके हूबहू हस्ताक्षर मौजूद थे। इस पत्र में विभाग के कुछ सेवारत ठेकेदारों पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की मांग की गई थी।

आमतौर पर किसी विधायक या जनप्रतिनिधि की शिकायत आने पर प्रशासनिक अमला तुरंत हरकत में आ जाता है। इस मामले में भी जब संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच की प्रक्रिया शुरू की और आरोपियों द्वारा चिन्हित किए गए ठेकेदारों से पूछताछ की, तो परदे के पीछे चल रहा वसूली का खेल उजागर होने लगा। ठेकेदारों ने आरोप लगाया कि इस शिकायत के नाम पर कुछ बिचौलियों द्वारा उनसे मामले को रफा-दफा करने के लिए भारी-भरकम राशि की मांग की जा रही थी।

विधायक चव्हाण के स्पष्टीकरण से उड़े होश

जब इस पूरी आंतरिक जांच और कथित शिकायत की प्रति खुद विधायक रवींद्र चव्हाण के सामने पहुंची, तो वे भी दंग रह गए। उन्होंने तुरंत अन्न एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के सचिव को एक लिखित और आधिकारिक स्पष्टीकरण पत्र सौंपा। चव्हाण ने साफ शब्दों में कहा, "मेरे कार्यकाल के दौरान ऐसा कोई भी पत्र या शिकायत इस विभाग को नहीं भेजी गई है। पत्र पर दिख रहा लेटरहेड पूरी तरह नकली है और नीचे किए गए हस्ताक्षर भी जाली (Forged) हैं। यह मेरी राजनीतिक छवि को खराब करने और ठेकेदारों को डराने की एक सोची-समझी साजिश है।"

संदिग्धों के नामों पर सस्पेंस और पुलिसिया जांच

इस राजनीतिक जालसाजी के सामने आने के बाद मंत्रालय के भीतर खलबली मच गई है। सूत्रों के मुताबिक, प्राथमिक जांच के दायरे में तीन स्थानीय रसूखदार नाम- अशोक लालचंद गुप्ता, विजय नखडू गुप्ता और शरद संभाजी कांबले आ रहे हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि इन लोगों ने ही प्रशासनिक अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच कड़ियाँ जोड़कर इस फर्जीवाड़े की स्क्रिप्ट लिखी थी। हालांकि, पुलिस और संबंधित विभाग ने अभी तक इन नामों की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की है और उनका कहना है कि पुख्ता सबूत मिलने के बाद ही कोई नामजद कार्रवाई की जाएगी।

दोषियों के खिलाफ होगी सख्त कानूनी कार्रवाई

विधायक रवींद्र चव्हाण की आधिकारिक शिकायत के बाद अब इस पूरे प्रकरण को मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) या साइबर सेल को सौंपने की तैयारी चल रही है। सरकारी दस्तावेजों की जालसाजी, धोखाधड़ी (Cheating) और जबरन रंगदारी वसूलने की धाराओं के तहत अज्ञात मास्टरमाइंड्स के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की जा रही है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि जांच पूरी होते ही इस राजनीतिक धोखाधड़ी के पीछे छिपे सभी सफेदपोश अपराधियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।

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