देवेंद्र फडणवीस (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Maharashtra News: राज्य सरकार की अलग-अलग योजनाओं से मुंबई में महिलाओं को बड़े पैमाने पर आर्थिक, सामाजिक और शिक्षा से जुड़े फ़ायदे मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना, ‘लेक लड़की’, ‘मातृ वंदना’ जैसी योजनाओं और लोन सुविधाओं ने लाखों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लाडली बहन योजना से 13 लाख से ज्यादा महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में राज्य सरकार ने महिला सशक्तिकरण को अहम जगह दी है। इसे अलग अलग योजनाओं के ज़रिए बढ़ावा दिया जा रहा है। कुछ बड़ी योजनाओं से मुंबई शहर और आस-पास के इलाकों की लाखों महिलाओं को सीधे फ़ायदा हुआ है, जिससे उनका स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली है।
लाडली बहन योजना का शहर में 3 लाख 77 हजार 300 और उपनगरों में 9 लाख 49 हजार 205 महिलाओं को फ़ायदा मिला है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक मदद देना, आत्मनिर्भरता बढ़ाना, हेल्थ व न्यूट्रिशन में सुधार करना और परिवार में उनकी भूमिका को मजबूत बनाना है।
डीबीटी के जरिए हर महीने 1,500 रुपये सीधे बैंक खाते में जमा किए जाएंगे, महाराष्ट्र की रहने वाली वे महिलाए इस योजना के लिए पात्र है, जिनकी उम्र 21 से 65 साल है और परिवार की सालाना आय 2.50 लाख रुपये से कम है। इस स्कीम में मुंबई बैंक में जीरो बैलेंस अकाउंट खोलने की सुविधा दी गई है। अब तक 53,357 महिलाओं ने ऐसे अकाउंट खोले हैं और उन्हें 10,000 से 1 लाख रुपये तक का लोन मिल रहा है।
यह लोन हर महीने 1,500 रुपये के मानदेय से किश्तों में चुकाया जा सकता है। खास बात यह है कि 5 से 10 महिलाओं के ग्रुप को एक साथ आकर बिजनेस शुरू करने का भी मौका है। इससे महिलाओं को सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट और फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस मिल रही है।
मुंबई में हमारी लाखों प्यारी बहनों के चेहरों पर जो खुशी है, वही हमारे काम का असली सबूत है। लाडली बहन योजना सिर्फ़ पैसे की मदद नहीं है, बल्कि महिलाओं की आत्मनिर्भरता की एक मजबूत नींव है। बहनों को मिला यह सम्मान उनकी तरक्की की नई दिशा तय करेगा, जब तक महायुति सरकार है, यह योजना कभी बंद नहीं होगी। आपका यह भाई आपके सशक्तिकरण के लिए आपके साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।
यह योजना गर्भवती व स्तनपान माताओं के लिए है। मुंबई शहर में लगभग 4,500 और आस-पास के इलाकों में 7,500 महिलाओं को इस स्कीम का लाभ मिला है। आंगनवाड़ी (शहर में 226, आस-पास के इलाकों में 4,221) के जरिए मदद दी जाती है। दो किश्तों में कुल 5,000 रुपये दिए जाते हैं। गर्भवती पंजीकरण के बाद 3,000 रुपये, डिलीवरी और वैक्सीनेशन के बाद 2,000 रुपये की मदद दी जाती है।
जो भारतीय महिलाएं पहली बार प्रेग्नेट और सरकारी नौकरी में न हो, वह इस योजना के लिए पात्र है। आंगनवाड़ी वर्कर या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इसका रजिस्ट्रेशन कराया जाता है। इसके लिए आधार कार्ड, प्रेग्नेंसी सर्टिफिकेट, बैंक डिटेल्स देना होता है। इस योजना के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन 1515 जारी किया गया है।
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इस योजना का मकसद लड़कियों की बर्थ रेट बढ़ाना, उनकी शिक्षा को बढ़ावा देना, बाल विवाह रोकना और कुपोषण कम करना है। मुंबई शहर में 228 और उपनगरों में 1,606 लाभार्थी लड़कियां हैं। लड़की का जन्म महाराष्ट्र में हुआ हो, परिवार की सालाना आय 1 लाख से कम हो, पीला या नारंगी राशन कार्ड हो, लड़की का जन्म 1 अप्रैल 2023 के बाद हुआ हो।
इस योजना में बेटी के जन्म के बाद 5,000 रुपये, कक्षा पहली में 6,000 रुपये, कक्षा छठवीं में 7,000 रुपये, कक्षा ग्यारहवीं में 8,000 रुपये और 18 साल की उम्र पूरी होने के बाद 75,000 रुपये कुल मदद 1,01,000 रुपये तक दी जाएगी।
इन योजनाओं से मुंबई में महिलाओं के आर्थिक, सामाजिक और शिक्षा विकास को बहुत बढ़ावा मिला है। परिवार में महिलाओं की स्थिति मजबूत हो रही है और उन्हें सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट के मौके मिल रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह योजनाएं महिला सशक्तिकरण में क्रांति ला रही हैं।
योजनाओं का लाभ उठा रही महिलाओं ने भी खुशी जताई है। उनका कहना है कि इससे हमारी जिंदगी में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है और हमें आत्मनिर्भर बनने में मदद मिल रही है।