तृतीय पंथियों की स्वास्थ्य समस्याओं पर बड़ा सरकारी फैसला, बेहतर इलाज और समान व्यवहार के लिए ठोस कदम
Transgender Health Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार ने तृतीय पंथी और एलजीबीटीक्यू+ समुदाय की स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिए जिला अस्पतालों में विशेष सुविधाएं सुनिश्चित करने का बड़ा निर्णय लिया है।
- Written By: आंचल लोखंडे
Maharashtra Government Decision (सोर्सः सोशल मीडिया)
Maharashtra Government Decision: महाराष्ट्र में तृतीय पंथी (ट्रांसजेंडर) समुदाय की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान और विभागीय समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से हाल ही में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह बैठक महाराष्ट्र राज्य की समाज कल्याण आयुक्त श्रीमती दीपा मुधोल-मुंडे की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें समुदाय के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, लिंग संवेदीकरण और बुनियादी ढांचे में सुधार पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में यह अहम निर्णय लिया गया कि राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में तृतीय पंथी तथा एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के साथ बिना किसी भेदभाव के समान व्यवहार सुनिश्चित किया जाएगा। इसके लिए गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के सहयोग से विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।
समुदाय की विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए निर्देश
- राज्य के सभी जिला अस्पतालों में तृतीय पंथियों के लिए स्वतंत्र वार्ड और आरक्षित बिस्तरों की व्यवस्था की जाएगी।
- जिला स्तर पर ‘मेडिकल बोर्ड’ का गठन किया जाएगा।
- जिला सिविल अस्पतालों में लिंग परिवर्तन सर्जरी (एसआरएस) के लिए परामर्श, उपचार और काउंसलिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
- प्रत्येक जिला अस्पताल में हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (एचआरटी) और एसआरएस के लिए एंडोक्रिनोलॉजिस्ट की नियुक्ति की जाएगी।
- अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों पर तृतीय पंथियों के लिए अलग शौचालयों का निर्माण किया जाएगा।
प्रशिक्षण और शिक्षा में बदलाव
सभी अस्पताल अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए ‘लिंग संवेदीकरण’ प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही चिकित्सा शिक्षा के पाठ्यक्रम में एचआरटी और एसआरएस जैसे विषयों को शामिल करने के लिए एक विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी।
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सरकारी योजनाओं का लाभ
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि ब्रेस्ट इंप्लांट और लेजर उपचार जैसी सुविधाओं को आयुष्मान भारत कार्ड के अंतर्गत शामिल करने की प्रक्रिया केंद्र सरकार स्तर पर शुरू हो चुकी है। इसके अलावा, एचआईवी से प्रभावित तृतीय पंथी मरीजों को एआरटी (ART) सेंटरों में प्राथमिकता के आधार पर उपचार देने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
प्रशासनिक तालमेल
यह बैठक विभागीय तृतीय पंथी अधिकार संरक्षण एवं कल्याण बोर्ड, पुणे की सह-अध्यक्ष डॉ. शिवानी गजबर के निवेदन पर आयोजित की गई थी। बैठक में स्वास्थ्य विभाग, सामाजिक न्याय विभाग और तृतीय पंथी कल्याण बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
