Mumbai Youth Congress Protest: पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में 2020 में हुए भारत-चीन संघर्ष की सच्चाई और पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे की संस्मरण पुस्तक (Memoir) के प्रकाशन को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। बुधवार को मुंबई युवा कांग्रेस के सदस्यों ने इस मुद्दे पर केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
मुंबई युवा कांग्रेस की अध्यक्ष जीनत शबरीन के नेतृत्व में दक्षिण मुंबई स्थित ‘राजीव गांधी भवन’ के बाहर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जुटे। कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर मोदी सरकार की सुरक्षा नीतियों की आलोचना की और जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर देश को अंधेरे में रख रही है।
प्रदर्शन के दौरान जीनत शबरीन ने तीखे सवाल दागते हुए कहा कि जून 2020 में गलवान घाटी में हमारे 20 जवान शहीद हो गए थे, लेकिन आज तक उस घटना की पूरी सच्चाई सामने नहीं आने दी गई। मोदी सरकार प्रमुख सुरक्षा मुद्दों पर चुप्पी साधे हुए है। हम मांग करते हैं कि सरकार चीन सीमा विवाद पर देश को स्पष्ट जवाब दे।
Detained but Unyielding. Today, as Mumbai Youth Congress marched towards the BJP Headquarters, we were detained by the police. Our protest was a stand against the government’s suppression of truth—highlighting the revelations from General Manoj Mukund Naravane’s unpublished… pic.twitter.com/PFWUwJ9aYN — Zeenat Shabrin (@ShabrinZeenat) February 4, 2026
युवा कांग्रेस ने विशेष रूप से पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे की उस किताब का मुद्दा उठाया, जिसके प्रकाशन पर फिलहाल रोक लगी हुई है। शबरीन ने आरोप लगाया कि सरकार नहीं चाहती कि उस समय के जमीनी हालात और रणनीतिक फैसलों की जानकारी जनता तक पहुंचे।
उन्होंने संसद की कार्यवाही का जिक्र करते हुए कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को इस संवेदनशील मुद्दे पर बोलने से रोका जा रहा है। यहां तक कि उन्हें जनरल नरवणे के अप्रकाशित संस्मरणों के उद्धरण (Quotes) देने की भी अनुमति नहीं दी गई, जो लोकतंत्र में सूचना की स्वतंत्रता पर प्रहार है।
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मुंबई युवा कांग्रेस ने मांग की है कि गलवान में हुई सैनिकों की शहादत के लिए जो भी कमियां जिम्मेदार थीं, उनकी जवाबदेही तय हो और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक सीमा विवाद और जनरल की किताब पर पारदर्शिता नहीं बरती जाती, उनका विरोध जारी रहेगा।