
देवेंद्र फडणवीस (सौजन्य-IANS)
Anti-Corruption Mechanism Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार ने विकास कार्यों में हो रही तमाम गड़बड़ियों पर लगाम कसने के लिए बड़ा और सख्त फैसला लिया है। अब जिला नियोजन समिति के निधि से होने वाले हर काम के लिए ‘इन्फ्रा आईडी’ लेना अनिवार्य कर दिया गया है। बिना इस आईडी के कोई भी काम मंजूर नहीं होगा।
अब तक एक ही काम को कई बार अलग-अलग नाम देकर दिखाना, मौके पर काम किए बिना बिल निकालना, दोषदायित्व अवधि पूरी होने से पहले उसी काम की दोबारा निविदा निकालना, टेंडर में तय काम छोड़ दूसरा काम करके पैसा खर्च करना और घटिया काम करने पर भी ठेकेदार को बचाना जैसे तमाम गैरप्रकार आम थे। लेकिन अब ‘इन्फ्रा आईडी’ के जरिए इन सब पर पूरी तरह रोक लग जाएगी।
काम का पूर्वानुमान पत्रक बनाते समय ही यह यूनिक आईडी जनरेट करनी होगी। इस आईडी में ठेकेदार का नाम, कितना निधि कहां से आया, काम की समय-सीमा, काम की तस्वीरें और जियो-लोकेशन सब कुछ दर्ज होगा।
इससे आमदार-खासदार निधि हो या जिल्हा नियोजन समिति का पैसा, ग्रामीण इलाकों से लेकर जिला परिषद और महानगरपालिका क्षेत्र तक हर विकास काम का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड तैयार हो जाएगा और कोई भी धांधली करना नामुमकिन हो जाएगा। सरकार का यह कदम विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में क्रांतिकारी साबित होने वाला है।
मान लीजिए एक स्कूल के लिए चार क्लासरूम बनाने का प्रावधान है। इसके लिए सबसे पहले मुख्य ‘इन्फ्रा आईडी’ बनेगा। अगले साल उसी स्कूल में और क्लासरूम बनवाने हों, तो नया अलग ‘इन्फ्रा आईडी’ बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उसके लिए उसी मुख्य आईडी के अंदर ‘सब-आईडी’ जनरेट की जाएगी। इस व्यवस्था से एक ही काम को बार-बार अलग-अलग दिखाकर निधि लेने या दोहराव की सारी गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
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बिना ‘इन्फ्रा आईडी’ के अब कोई काम मान्यता नहीं पाएगा। जिला नियोजन समिति के निधि से होने वाले हर काम की जांच अब सख्ती से किया जाएगा। अगर काम महानगरपालिका क्षेत्र में है तो आयुक्त, ग्रामीण क्षेत्र में है तो जिलाधिकारी और जिला परिषद क्षेत्र में है तो मुख्य कार्यकारी अधिकारी इसकी जांच करेंगे। मूल्यांकन के दौरान यदि कोई विकास कार्य पूरा हुआ पाया गया, लेकिन उसका ‘इन्फ्रा आईडी’ नहीं है, तो उसे किसी भी हाल में मान्यता नहीं दी जाएगी।






