Ganesh Naik (सोर्सः सोशल मीडिया)
Leopard Attacks Maharashtra: राज्य के जंगलों से सटी मानवीय बस्तियों में जंगली जानवरों के हमलों की घटनाएं बढ़ रही हैं। सांगली जिला के चांदोली अभयारण्य से सटे शिराला-वालवा क्षेत्र में तेंदुओं की बढ़ती गतिविधियों के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने लगा है। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार कई उपाय कर रही है। यह जानकारी राज्य के वन मंत्री गणेश नाईक ने विधानसभा में दी।
इस मुद्दे पर विधायक सत्यजित देशमुख ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव रखा था, जिस पर हुई चर्चा में विधायक गोपिचंद पडलकर ने भी भाग लिया। वन मंत्री ने बताया कि सांगली जिले के शिराला तालुका में राजवीर हनुमंत पाटिल नाम का एक बच्चा घर के आंगन में खेल रहा था, तभी एक तेंदुआ उसे उठाकर ले गया, जिससे उसकी मौत हो गई। इस घटना में लापरवाही के आरोप सामने आने के बाद संबंधित वन क्षेत्रपाल पारधी को निलंबित कर दिया गया है।
मंत्री नाईक ने बताया कि राज्य में तेंदुओं की संख्या और गतिविधियों के प्रबंधन के लिए केंद्र सरकार के वन्यजीव विभाग के मार्गदर्शन में कुछ प्रायोगिक परियोजनाएं शुरू की गई हैं। पुणे जिला के जुन्नर और शिरूर क्षेत्रों में तेंदुआ प्रबंधन का एक पायलट प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है, जिसके परिणाम आने वाले महीनों में सामने आने की उम्मीद है।
मानव आणि वन्यजीवांमधील संघर्ष कमी करण्यासाठी मोठे पाऊल उचलण्यात आले असून आज वनतारा सोबत 50 बिबट्यांचा करार मंत्रालय येथे करण्यात आला. पाहूया याचीच काही क्षणचित्रं. #मानव_वन्यजीव_संघर्ष#Vantara#Maharashtra pic.twitter.com/VZtvNKKWTj — Ganesh Naik (@NaikSpeaks) March 5, 2026
वन मंत्री ने कहा कि तेंदुए को वन्यजीव संरक्षण कानून की ‘शेड्यूल-1’ श्रेणी से ‘शेड्यूल-2’ में शामिल करने के प्रस्ताव को राज्य मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है और इसके लिए केंद्र सरकार से अनुमति मांगी गई है। वनतारा वन्यजीव केंद्र में अब तक 25 तेंदुओं को स्थानांतरित किया जा चुका है और जल्द ही 25 अन्य तेंदुओं को भी वहां भेजा जाएगा। कुछ अन्य राज्यों ने भी तेंदुओं की मांग की है, जिस पर केंद्र की अनुमति मिलने के बाद निर्णय लिया जाएगा।
मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए सैटेलाइट तकनीक, स्टैंडअलोन कैमरे और अलर्ट सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है। तेंदुए की गतिविधि दिखाई देने पर एक किलोमीटर के दायरे में तेज आवाज से चेतावनी देने वाली प्रणाली भी स्थापित की जा रही है। साथ ही वन, राजस्व और पुलिस विभाग, जनप्रतिनिधियों तथा स्वयंसेवी संगठनों के माध्यम से जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।
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मंत्री नाईक ने बताया कि पहले शिरूर क्षेत्र में एक अधिकारी ने जंगल में बकरियां छोड़ने का प्रयोग किया था, जिससे तेंदुआ हमलों को कुछ हद तक नियंत्रित करने में सफलता मिली थी। हालांकि इसे अंतिम समाधान नहीं माना जा रहा है और अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि जहां नए पौधे लगाए गए हैं, वहां चराई पर प्रतिबंध रखा जाए, जबकि बड़े पेड़ों वाले क्षेत्रों में बकरी-भेड़ों को चराने की अनुमति दी जा सकती है।