पुणे मनपा का 14,000 करोड़ का बजट पेश, राजस्व बढ़ाने की चुनौती बरकरार

PMC ने 2026-27 के लिए लगभग 14,000 करोड़ रुपये का बजट पेश किया है। हालांकि संपत्ति कर बढ़ोतरी प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद राजस्व बढ़ाने के लिए कोई स्पष्ट रणनीति सामने नहीं आई है।
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पुणे मनपा (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Pune Municipal Corporation Budget 2026: शहर की सीमा के विस्तार और तीव शहरीकरण के कारण पुणे महानगर पालिका (पीएमसी) के समक्ष राजस्व बढ़ाने की विकट चुनौती खड़ी हो गई है।

प्रशासन द्वारा प्रस्तावित 'संपत्ति कर' में वृद्धि के प्रस्ताव को स्थायी समिति पहले ही ठुकरा चुकी है। ऐसे में 2026-27 के बजट में आय वृद्धि के लिए कोई ठोस उपाय दृष्टिगोचर नहीं हो रहे हैं। बजट में मुख्य रूप से सरकारी अनुदान, ऋण और बॉण्ड के माध्यम से निधि जुटाने पर जोर दिया गया है।

बढ़ाया जाएगा बजटीय प्रावधान

आयुक्त नवल किशोर राम ने लगभग 14,000 करोड़ रुपये का बजट स्थायी समिति के समक्ष प्रस्तुत किया है। अब नगरसेवकों द्वारा सुझाए गए विकास कार्यों और सत्तारूढ़ दल की प्राथमिकताओं के आधार पर इसमें नई योजनाओं को सम्मिलित किया जाएगा। संभावना है कि स्थायी समिति इस बजट का आकार बढ़ाकर 16,000 से 18,000 करोड़ रुपये तक ले जा सकती है। गौरतलब है कि पिछले चार वर्षों से मनपा में निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं थे, लेकिन इस बार सदन की उपस्थिति के कारण बजट पर सत्ताधारी दल की स्पष्ट छाप देखने को मिल सकती है।

वादाः संपत्ति कर में छूट

भाजपा ने सत्ता में आने पर 500 वर्ग फुट तक के घरों को संपत्ति कर से मुक्त करने की घोषणा की थी। जिस पर कांग्रेस ने भी स्थायी समिति में सहमति जताते हुए प्रस्ताव दिया है। यदि यह छूट लागू होती है, तो राजस्व में लगभग 250 करोड़ रुपये की कमी आएगी।

इस वित्तीय घाटे की पूर्ति करना सत्ताधारी दल के लिए एक बड़ी परीक्षा होगी, आकड़ों के अनुसार, प्रशासन ने विभिन्न स्रोतों से आय का अनुमान लगाया है। जीएसटी से 3,352 रुपये, स्थानीय संस्था कर से 845 करोड़ रुपये, संपत्ति कर से 3,352 करोड़ रुपये, निर्माण विकास शुल्क से 3,403 करोड़ रुपये, पानी कर से 741 करोड़ रुपये और अन्य स्रोतों से 1,203 करोड़ रुपये की आय का अनुमान है।

बकाया वसूली पर नीति नहीं

भारी-भरकम बजट के बावजूद राजस्व वृद्धि के लिए बजट में स्पष्ट रोडमैप दिखाई नहीं देता। प्रशासन का कहना है कि 'आकाश चिह्न' (होर्डिंग) विभाग से होने वाली आय पर सदन में नीतिगत निर्णय लिया जाएगा। न्यायालयों में लंबित संपत्ति कर के मामलों और बकाया वसूली भी कोई ठोस नीति घोषित नहीं की गई है।

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