महाराष्ट्र में अपना सूपड़ा साफ कर रही कांग्रेस! अंबादास दानवे को पार्टी के समर्थन से भड़के कार्यकर्ता
Congress Workers Angry on Ambadas Danve: अंबादास दानवे को समर्थन देने पर महाराष्ट्र कांग्रेस में भारी नाराजगी। तहसीन पूनावाला ने पार्टी के भविष्य पर उठाए गंभीर सवाल।
- Written By: अनिल सिंह
महाराष्ट्र की राजनीति: अपनों के ही निशाने पर कांग्रेस नेतृत्व (प्रतीकात्मक तस्वीर)
Congress Workers on Ambadas Danve: महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में महाविकास आघाडी की ओर से अंबादास दानवे की उम्मीदवारी का समर्थन करने के कांग्रेस के निर्णय ने पार्टी के भीतर असंतोष की लहर पैदा कर दी है। जहाँ एक ओर पार्टी नेतृत्व इसे गठबंधन की एकजुटता बता रहा है, वहीं दूसरी ओर समर्थकों का मानना है कि कांग्रेस लगातार अपने सहयोगियों के सामने झुक रही है। इस असंतोष की मुख्य वजह यह है कि राज्यसभा चुनावों में सीट NCP (शरदचंद्र पवार) के पास गई और अब विधान परिषद की महत्वपूर्ण सीट भी शिवसेना (UBT) के खाते में चली गई है।
पार्टी के भीतर यह चर्चा जोरों पर है कि आखिर इन समझौतों के बदले कांग्रेस को क्या हासिल हुआ। इससे पहले दिसंबर 2025 में जब शरद पवार ने संन्यास का संकेत दिया था, तब यह माना जा रहा था कि राज्यसभा के लिए कांग्रेस के किसी युवा नेता को मौका मिलेगा। हालांकि, अंत में शरद पवार ही राज्यसभा गए, जिससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा।
“पार्टी वहीं बर्बाद हो रही जहाँ जन्म हुआ”
कांग्रेस समर्थक और विश्लेषक तहसीन पूनावाला ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर अपनी गहरी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने लिखा कि शिवसेना (UBT) ने अंबादास दानवे के नाम की घोषणा एकतरफा तरीके से की और कांग्रेस नेतृत्व ने बिना किसी विरोध के इसे स्वीकार कर लिया। पूनावाला ने कड़े शब्दों में सवाल किया कि क्या अब पार्टी को महाराष्ट्र में अपना बोरिया-बिस्तर समेट लेना चाहिए, क्योंकि जिस राज्य में कांग्रेस का जन्म हुआ, आज वहीं वह हाशिए पर जा रही है।
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कार्यकर्ताओं की भविष्य को लेकर चिंता
पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि इसी तरह अन्य दल सीटें लेते रहे, तो आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के पास अपने कैडर को देने के लिए कुछ नहीं बचेगा। समर्थकों में यह डर व्याप्त है कि गठबंधन की राजनीति में कांग्रेस अपनी पहचान खोती जा रही है। कार्यकर्ताओं का तर्क है कि जब भविष्य में किसी पद की कोई गारंटी ही नहीं है, तो वे किस आधार पर जनता के बीच जाएंगे।
नेतृत्व पर बढ़ता दबाव
फिलहाल, महाराष्ट्र कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व इस मामले पर चुप्पी साधे हुए है, लेकिन जमीनी स्तर पर बढ़ता आक्रोश पार्टी के लिए खतरे की घंटी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस ने जल्द ही अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की और सीटों के सम्मानजनक बंटवारे पर जोर नहीं दिया, तो कार्यकर्ताओं की यह नाराजगी आगामी चुनावों के परिणामों को प्रभावित कर सकती है। अब देखना यह होगा कि पार्टी आलाकमान इस ‘इंटरनल डैमेज’ को कंट्रोल करने के लिए क्या कदम उठाता है।
