मंत्री चंद्रकांत पाटिल पर आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप, कांग्रेस पहुंची निर्वाचन आयोग
Chandrakant Patil MCC Violation: महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों से पहले सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने भाजपा मंत्री चंद्रकांत पाटिल पर आचार संहिता के उल्लंघन का गंभीर आरोप लगाया है।
- Written By: आकाश मसने
मंत्री चंद्रकांत पाटिल (सोर्स: सोशल मीडिया)
Congress Complaint Against Chandrakant Patil: महाराष्ट्र में 5 फरवरी को होने वाले जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों से पहले राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कैबिनेट मंत्री चंद्रकांत पाटिल के खिलाफ राज्य निर्वाचन आयोग में मोर्चा खोलते हुए उन पर सत्ता के दुरुपयोग और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया है।
विपक्षी उम्मीदवारों पर ‘नाम वापसी’ के लिए दबाव बनाने का आरोप
महाराष्ट्र कांग्रेस के मुखिया हर्षवर्धन सपकाल ने भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री चंद्रकांत पाटिल पर लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रखने का आरोप लगाया है। सपकाल के अनुसार, पाटिल ने सार्वजनिक मंचों से विपक्षी प्रत्याशियों को अपना नामांकन वापस लेने के लिए कहा। कांग्रेस का दावा है कि सांगली जिले में एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने खुलेआम कहा कि विपक्ष के जीतने की कोई संभावना नहीं है, इसलिए वे अपना समय और धन बर्बाद न करें।
निर्वाचन आयोग से सख्त कार्रवाई की मांग
हर्षवर्धन सपकाल ने राज्य निर्वाचन आयुक्त दिनेश वाघमारे को एक औपचारिक पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पाटिल का यह बयान न केवल आदर्श आचार संहिता (MCC) का सीधा उल्लंघन है, बल्कि यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की भावना के भी खिलाफ है। कांग्रेस ने मांग की है कि मंत्री के खिलाफ तत्काल मामला दर्ज किया जाए और चुनाव के दौरान उनकी जनसभाओं पर प्रतिबंध लगाया जाए।
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लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला: कांग्रेस
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने अपने पत्र में इस बात पर जोर दिया कि स्वतंत्र चुनाव कराना निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “जब सरकार का कोई जिम्मेदार मंत्री विपक्षी उम्मीदवारों को डराने या उन्हें चुनाव से हटने के लिए मजबूर करने की कोशिश करता है, तो यह लोकतंत्र पर सीधा हमला है।” उन्होंने इस घटना को चुनाव प्रक्रिया में अनुचित हस्तक्षेप करार दिया।
5 फरवरी को होना है मतदान
गौरतलब है कि राज्य की 12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों के लिए 5 फरवरी को वोट डाले जाने हैं। नामांकन वापस लेने की प्रक्रिया के दौरान आए इस विवाद ने चुनावी माहौल को और अधिक गर्मा दिया है। अब सभी की निगाहें राज्य निर्वाचन आयोग पर टिकी हैं कि वह सत्ताधारी दल के मंत्री के खिलाफ क्या कदम उठाता है।
