अंतरराष्ट्रीय तटीय सफाई दिवस: जुहू बीच चमका, 110 विद्यार्थियों ने हटाया प्लास्टिक का पहाड़
Mumbai News: अंतरराष्ट्रीय तटीय सफाई दिवस पर जुहू बीच पर 110 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। प्लास्टिक और कचरा हटाकर उन्होंने सफाई का संदेश दिया। यह अभियान स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर पहल का हिस्सा था।
- Written By: सोनाली चावरे
जुहू समुद्र तट की सफाई (pic credit; social media)
International Coastal Cleanup Day: अंतरराष्ट्रीय तटीय सफाई दिवस के मौके पर मुंबई का जुहू समुद्र तट सामाजिक जिम्मेदारी और पर्यावरण संरक्षण का गवाह बना। समुद्र तट पर आयोजित सफाई अभियान में घाटकोपर स्थित रामनिरंजन झुनझुनवाला कॉलेज के 110 विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ भाग लिया और समुद्र किनारे फैले प्लास्टिक व अन्य कचरे को एकत्रित कर साफ-सफाई की।
यह विशेष अभियान भारत सरकार के चेन्नई राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र (NCCR) के सहयोग से आयोजित किया गया था। अभियान का उद्घाटन हिंदी विद्या प्रचार समिति की निदेशक डॉ. उषा मुकुंदन और कॉलेज के प्राचार्य डॉ. हिमांशु दावड़ा ने किया। विद्यार्थियों ने समुद्र तट की सफाई कर “स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर” का संदेश दिया और यह दिखाया कि पर्यावरण संरक्षण सिर्फ सरकारी दायित्व नहीं बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
इस सफाई पहल के तहत भारत के सभी तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के समुद्र तटों पर एक साथ सफाई अभियान चलाया गया। इसका मुख्य उद्देश्य समुद्री प्रदूषण को कम करना, समुद्र को प्लास्टिक मुक्त बनाना और पर्यावरण संतुलन को बनाए रखना है।
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कार्यक्रम का समन्वय प्रोफेसर (डॉ.) अनिल आव्हाड ने किया, जबकि एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. डी.बी. सिंह और प्रणाली कर्णिक ने विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देकर अभियान को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। विद्यार्थियों ने उत्साह से घंटों मेहनत कर समुद्र तट से बोतलें, थैलियां, पैकेजिंग मटेरियल और अन्य प्लास्टिक कचरे को हटाया।
इस सफाई अभियान का उद्देश्य युवाओं में जागरूकता बढ़ाना भी था ताकि वे आगे चलकर पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी को गंभीरता से निभा सकें। विद्यार्थियों ने संदेश दिया कि अगर हर नागरिक अपनी छोटी सी जिम्मेदारी निभाए तो समुद्र और समुद्र तटों को प्रदूषण मुक्त बनाया जा सकता है।
नागरिकों और स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने भी इस पहल का स्वागत किया। उनका कहना है कि समुद्र तटों की नियमित सफाई से न केवल प्रदूषण कम होगा बल्कि समुद्री जीव-जंतु और पारिस्थितिकी तंत्र भी सुरक्षित रहेगा। जुहू बीच का यह अभियान एक छोटा प्रयास जरूर था, लेकिन इसने साबित किया कि जब युवा आगे आते हैं तो बड़ा बदलाव संभव है।
