मुंबई लोकल का जानलेवा सफर, 8 साल में हादसों में ‘इतने’ लोगों ने गंवाई जान
Mumbai Local Train News: सेंट्रल रेलवे द्वारा बॉम्बे हाई कोर्ट में दिए गए हलफनामे से पता चलता है कि 2018 में पटरी पार करते समय ट्रेनों की चपेट में आने के कारण 1022 लोगों की मौत हुई।
- Written By: आंचल लोखंडे
ये है मुंबई लोकल की जानलेवा सवारी (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Mumbai News: मध्य रेलवे ने बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया कि 2025 के पहले 5 महीनों में ही 443 लोगों की रेल की पटरियों पर अतिक्रमण करते हुए और लोकल ट्रेनों से गिरकर मौत हो चुकी है। बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश का पालन करते हुए मध्य रेलवे ने अधिवक्ता अनामिका मल्होत्रा के माध्यम से अपना हलफनामा दायर किया है, हलफनामे में कहा गया है कि दुर्घटनाओं का मुख्य कारण रेलवे ट्रैक पर अतिक्रमण, ट्रैक पार करते समय ट्रेनों की चपेट में आना और चलती ट्रेन से गिरना शामिल है।
सेंट्रल रेलवे द्वारा बॉम्बे हाई कोर्ट में दिए गए हलफनामे से पता चलता है कि 2018 में पटरी पार करते समय ट्रेनों की चपेट में आने के कारण 1022 लोगों की मौत हुई, जबकि चलती ट्रेन से गिरने के कारण 482 लोगों की मौत हुई। 2019 में ट्रैक पार करने के दौरान 920 लोगों की मौत हुई, जबकि चलती ट्रेन से गिरकर हुई दुर्घटना में 426 लोगों की मौत हुई। 2020 में ट्रैक पार करते समय ट्रेनों की चपेट में आकर 471 लोगों की मौत हुई, जबकि चलती ट्रेन से नीचे गिरने के कारण 134 लोगों की मौत हुई।
लगातार हो रहे हादसे
तो वहीं 2021 में ट्रैक पार करते समय ट्रेन की चपेट में आकर 748 लोगों की मौत हुई है, जबकि चलती ट्रेन से गिरने के कारण 189 लोगों की मौत हुई। 2022 में यह संख्या क्रमश: 654 और 510, 2023 में 782 और 431 और 2024 में 674 और 387 रही। इस साल मई माह तक ट्रैक पार करते समय ट्रेन की चपेट में आकर 293 लोगों की मौत हो चुकी है और चलती ट्रेन से गिरने के कारण अब तक 150 लोगों की मौत हो चुकी है। गत 9 जून को मुंब्रा की घटना के बाद जिसमें 8 यात्री एक-दूसरे के पास से गुजर रही दो लोकल ट्रेनों से गिर गए, जिनमें से 5 की मौत हो गई थी।
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने मध्य रेलवे से मांगी थी हादसों की रिपोर्ट
घटना का संज्ञान लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने मध्य रेलवे से बिते कुछ सालों के दौरान हुए इस तरह के हादसों की रिपोर्ट मांगी थी। कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए सेंट्रल रेलवे ने यह हलफनामा दायर किया था।
मुंब्रा की घटना की प्रारंभिक जांच से पता चला है कि दो तेज गति वाली लोकल ट्रेनों के एक साथ गुजरने के कारण ट्रैक पर जब कर्व आया तो दरवाजे के पास खड़े यात्रियों का संतुलन बिगड़ा और जिन्होंने ठीक से कुछ पकड़ा नहीं था वे नीचे गिर गए। ऐसे हादसों की प्रमुख वजह रेलवे पटरियों पर अतिक्रमण, असवाधानी से ट्रैक पार करना और चलती ट्रेनों में दरवाजे पर लटकर यात्रा करना शामिल है।
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भीड़ कम करने के लिए उठाए कई कदम
हालांकि मध्य रेल प्रशासन लोकल ट्रेनों में भीड़ कम करने के लिए कई कदम उठा रहा है। मध्य रेल मार्ग पर लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं और इनमें कई यात्रियों की जान जा रही है। भीड़ के कारण यात्रियों को अक्सर दरवाजों के पास खड़े होकर यात्रा करनी पड़ती है। यात्रियों की इसी असुविधा को देखते हुए मध्य रेल प्रशासन ने एक अहम फैसला लिया है।
मध्य रेलवे ने मुंबई के 800 से ज़्यादा निजी कार्यालयों, जिनमें सरकारी कार्यालय, कॉलेज और बैंक शामिल हैं, को अपने काम के समय में बदलाव करने के लिए पत्र भेजे थे। कुछ कंपनियों ने मध्य रेल प्रशासन द्वारा किए गए अनुरोध पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। बावजूद इसके कुछ भी खास असर नज़र नहीं आ रहा है।
