वैश्विक संकटः महाराष्ट्र के 75 लाख MSME के लिए तत्काल राहत उपाय़ जरूरी, एसोचैम ने सरकार और RBI से किया आग्रह
West Asia Crisis Impact: से प्रभावित MSME सेक्टर के लिए एसोचैम ने केंद्र सरकार और RBI से तत्काल राहत उपायों की मांग की है, जिसमें ब्याज सब्सिडी और ऋण चुकौती में राहत शामिल है।
- Written By: सूर्यप्रकाश मिश्र | Edited By: आलोक उमाकृष्ण
एसोचैम महाराष्ट्र काउंसिल अध्यक्ष मिलिंद हार्डिकर (सोर्सः डिज़ाइन फोटो)
Maharashtra MSMEs Assocham Urges: पश्चिम एशिया संकट के कारण वैसे तो सभी उद्योग क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन सबसे अधिक असर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों यानी महाराष्ट्र के 75 लाख MSMEs पर पड़ रहा है। उद्योग संगठन एसोचैम (Assocham) ने केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से आग्रह किया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के इंजन एमएसएमई सेक्टर के लिए राहत उपाय़ तत्काल किए जाए।
‘एसोचैम’ की महाराष्ट्र काउंसिल के नवनियुक्त अध्यक्ष मिलिंद हार्डिकर ने कहा कि उद्योगों पर इस वैश्विक संकट का असर शिपिंग भाड़ा दरों में तेज बढ़ोतरी, ट्रांजिट में देरी, कच्चे माल की कीमतों में उछाल, ऊर्जा की कमी के साथ-साथ फोरेक्स के लिए सट्टा फॉरवर्ड कवर, बीमा प्रीमियम दर वृद्धि और एलसी कन्फर्मेशन शुल्क में बढ़ोतरी के रूप में दिख रहा है।
हार्डिकर ने कहा कि हालांकि सरकार ने एमएसएमई की मदद के लिए ECLGS 5.0 और कोलैटरल फ्री क्रेडिट गारंटी योजना जैसे कई सराहनीय कदम उठाए हैं, लेकिन कुछ और उपायों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ‘एसोचैम’ ने हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की और इस वैश्विक संकट से प्रभावित राज्य के एमएसएमई को राहत देने के लिए 5 करोड़ रुपये तक की कार्यशील पूंजी पर 2 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी का आग्रह किया।
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इसके साथ ही MSMEs को ऋण चुकौती में राहत के रूप में उनके बकाया ऋणों को एनपीए (NPA) के रूप में वर्गीकृत करने की अवधि 90 से बढ़ाकर 180 दिन करने का भी अनुरोध किया।
लागत कम करने की जरूरत
हार्डिकर ने कहा कि ‘एसोचैम’ ने राज्य सरकार से भी एमएसएमई से जुड़ी लागतों को कम करने के लिए हस्तक्षेप का आग्रह किया है। इनमें वित्तीय लागत, परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत, बिजली लागत और अनुपालन लागत, साथ ही कुशल श्रम शक्ति लागत शामिल है।
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एमएसएमई के लिए नए अवसर
उन्होंने कहा कि देश की जीडीपी में सबसे अधिक करीब 15 प्रतिशत का योगदान देने वाले महाराष्ट्र में 75 लाख एमएसएमई हैं, जिन्हें बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस निरंतर प्रयास कर रहे हैं। राज्य सरकार ने ‘मैत्री’ और ‘इन्वेस्ट महाराष्ट्र’ जैसी अनुकूल पहलें की हैं।
केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न देशों के साथ व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर से राज्य के एमएसएमई के लिए भी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का हिस्सा बनने के नए अवसर खुले हैं। महाराष्ट्र ईवी, रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है। एमएसएमई को पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग से हाई वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग की ओर बढ़ने की जरूरत है।
