Maharashtra News: वन मंत्री के ‘एक करोड़ बकरियां’ बयान पर मचा बवाल, मंदा म्हात्रे का तंज
Forest Minister Ganesh Naik के जंगल में एक करोड़ बकरियां छोड़ने के बयान पर विपक्ष ने तीखा तंज कसा। तेंदुओं की बढ़ती संख्या, नसबंदी और जंगल की बायोडायवर्सिटी पर नई बहस छिड़ गई।
- Written By: अपूर्वा नायक
मंदा म्हात्रे और गणेश नाईक (सौ. डिजाइन फोटो )
Navi Mumbai News In Hindi: नागपुर समेत राज्य के अलग-अलग हिस्सों में तेंदुए उत्पात मचा रहे हैं। इसे देखते हुए वन मंत्री गणेश नाईक ने कहा था कि एक करोड़ बकरियां जंगल में छोड़ी जाएंगी।
इस पर भाजपा विधायक मंदा म्हात्रे ने तंज कसते हुए कहा है कि जो लोग जंगल में एक करोड़ बकरियां छोड़ने की बात कह रहे हैं, उन्हें यह बात भी बता देनी चाहिए कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में बकरियां कहां से लाई जाएंगी।
वे नागपुर में विधान भवन के परिसर में पत्रकारों के साथ बातचीत कर रही थीं। उसी समय उन्होंने यह मुद्दा भी उठाया। वन मंत्री गणेश नाईक ने ऐलान किया है कि तेंदुओं से निपटने के लिए एक करोड़ बकरियां जंगल में छोड़ी जाएंगी। उनका कहना है कि यह सॉल्यूशन अस्थायी है।
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लोमड़ियों-हिरणों की संख्या बढ़ाने की जरूरत: लोमड़ियों और हिरणों की बायोडायवर्सिटी चेन बढ़ाने की जरूरत है। ये सभी जानवर तेंदुओं का खाना हैं। इनकी संख्या बढ़ाई जानी चाहिए, तेंदुओं के लिए एक करोड़ बकरियां कहां से लाई जाएंगी।
कुत्ते तो नहीं पकड़ पा रहे, तेंदुए कैसे पकड़ेंगे
इस बारे में विधायक डॉ। आशीष देशमुख ने कहा कि वन मंत्री गणेश नाईक ने तेंदुओं को शेड्यूल वन से शेड्यूल टू में लाने के लिए केंद्र सरकार को प्रपोजल भेजा है। असल में, तेंदुए साल में तीन से चार बच्चों को जन्म देते हैं। इस वजह से इनकी संख्या बढ़ी है। संख्या कम करने के लिए नसबंदी का तरीका अपनाना चाहिए।
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विधान भवन परिसर में बड़ी संख्या मैं आवारा कुत्ते हैं, सेशन के पहले दिन, दो-तीन कुत्ते विधायकों के स्वागत के लिए बिछाए गए रेड कार्पेट पर बिना रोक-टोक के घूम रहे थे। इसके अलावा, इलाके के दूसरे इलाकों में भी आवारा कुत्ते पाए गए हैं। कुत्तों के काटने और तेंदुए के हमले जैसे दोनों ही मुद्दे आजकल खबरों में हैं। इसी बैकग्राउंड में, जयंत पाटिल ने सरकार की आलोचना की है।
