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विरोध के बाद बैकफुट पर सरकार! कर्जमाफी के कड़े नियमों को बदलने के लिए बनी कमेटी

Ahilyadevi Holkar Farmer Loan Waiver Criteria: महाराष्ट्र सरकार ने अहिल्यादेवी होलकर किसान कर्जमाफी योजना के कड़े नियमों की समीक्षा और बदलाव के लिए समितियों का गठन किया।

  • Written By: अनिल सिंह
Updated On: Jun 19, 2026 | 06:24 PM

किसान कर्जमाफी के नियमों में सुधार के लिए बनी कमेटी (फोटो क्रेडिट-X)

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Ahilyadevi Holkar Farmer Loan Waiver: महाराष्ट्र विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों के मुहाने पर खड़ी महायुति सरकार द्वारा घोषित ‘पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर शेतकरी कर्जमुक्ति योजना 2026’ को लेकर राज्य भर के किसानों और विपक्षी दलों का गुस्सा फूट पड़ा है। हालांकि राज्य मंत्रिमंडल ने बीते 2 जून 2026 को इस बहुप्रतीक्षित योजना को मंजूरी देते हुए इसका सरकारी निर्णय (GR) भी जारी कर दिया था, लेकिन इसके साथ जोड़ी गईं कड़ी शर्तों और पेचीदा नियमों के कारण किसान संगठनों में भारी नाराजगी है। इस असंतोष के बीच, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने पंढरपुर में अन्नत्याग (खाद्य बहिष्कार) आंदोलन शुरू कर दिया है।

चौतरफा बढ़ते राजनीतिक दबाव को देखते हुए राज्य सरकार ने अब बैकफुट पर आते हुए योजना के दिशा-निर्देशों और मानदंडों की समीक्षा करने व उनमें आवश्यक बदलाव करने के लिए तीन अलग-अलग उच्च-स्तरीय समितियों का गठन किया है।

नियमों में बदलाव के लिए बनी समितियां

किसानों के आक्रोश को शांत करने और योजना के पारदर्शी कार्यान्वयन के लिए सरकार ने सीधे मुख्य सचिव (Chief Secretary) की अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन किया है, जो इस योजना के मौजूदा दिशा-निर्देशों में सुधार का मसौदा तैयार करेगी। इसके अलावा, अंतिम निर्णय लेने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में एक ‘कैबिनेट उप-समिति’ (Cabinet Sub-Committee) बनाई गई है। इस शक्तिशाली समिति में दोनों उपमुख्यमंत्री (सुनेत्रा पवार, एकनाथ शिंदे) सहित राज्य के राजस्व, चिकित्सा शिक्षा, कृषि और सहकारिता मंत्री शामिल किए गए हैं। यह उप-समिति नियमित रूप से योजना की समीक्षा करेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी पात्र किसान इस लाभ से वंचित न रहे।

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आखिर नई कर्जमाफी योजना की किन शर्तों से नाराज हैं महाराष्ट्र के किसान?

सरकारी निर्णय के अनुसार, सरकार ने 30 सितंबर 2025 तक बकाया रहे 2 लाख रुपये तक के कृषि ऋण को माफ करने का फैसला किया है। लेकिन किसान और विपक्षी नेता मुख्य रूप से निम्नलिखित तीन शर्तों के कारण इसे ‘दिखावा’ बता रहे हैं:

2019 के लाभार्थियों की अनदेखी: साल 2019 में तत्कालीन महाविकास अघाड़ी सरकार द्वारा लागू की गई ‘महात्मा फुले कर्जमाफी योजना‘ के तहत जिन 32 लाख 29 हजार किसानों का कर्ज माफ हुआ था, उन्हें इस नई योजना के मुख्य लाभ से बाहर कर दिया गया है।

नियमित कर्जदारों के साथ अन्याय: जो किसान नियमित रूप से अपना बैंक लोन चुकाते आ रहे हैं, उन्हें प्रोत्साहन राशि के रूप में केवल 50 हजार रुपये दिए जाएंगे। इसके लिए भी शर्त है कि वे कम से कम पिछले दो वर्षों से नियमित कर्जदार रहे हों।

लाखों किसानों को कम लाभ: पूर्व की योजना का लाभ ले चुके करीब 12 लाख 71 हजार किसानों को इस बार केवल 50 हजार रुपये की ही मामूली सहायता मिल सकेगी, जिसे किसान नेता नाकाफी बता रहे हैं।

चुनाव से पहले मानदंडों में ढील देने की तैयारी, क्या मिलेगा फायदा?

किसान नेताओं का स्पष्ट आरोप है कि सरकार ने केवल चुनाव जीतने के लिए आनन-फानन में इस योजना की घोषणा की है, लेकिन इसकी बारीकियों में ऐसे पेंच फंसा दिए हैं जिससे आधे से ज्यादा किसान अपात्र हो जाएं। इसी मंशा पर उठे सवालों और रोहित पवार के अनशन के बाद अब मुख्यमंत्री फडणवीस की अध्यक्षता वाली कैबिनेट उप-समिति नियमों को उदार बनाने की कोशिश में जुटी है। यदि मुख्य सचिव की समिति की सिफारिशों के बाद पुराने लाभार्थियों को भी इसमें शामिल किया जाता है या 2 लाख की समय-सीमा को बढ़ाया जाता है, तो ही चुनावी साल में सरकार को इसका सीधा राजनीतिक लाभ मिल सकेगा।

Farmer loan waiver scheme criteria change committee rohit pawar protest

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Published On: Jun 19, 2026 | 06:24 PM

Topics:  

  • Farmers Protest
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