CM Fadnavis के 100 सीट दावे से महायुति में खलबली, शिंदे गुट की बढ़ी टेंशन

CM Devendra Fadnavis के बीएमसी में 100 सीटें जीतने के दावे से महायुति में तनाव बढ़ा। बीजेपी 150 सीटों पर अड़ गई, जिससे शिंदे गुट के लिए सीटें कम पड़ रही हैं और गुट में असंतोष बढ़ रहा है।
CM Devendra Fadnavis And DCM Eknath Shinde
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (सौ. डिजाइन फोटो )
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Maharashtra Local Body Election: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीजेपी के दम पर बीएमसी की 100 सीटें जीतने के दावे ने महायुति में खलबली मचा दी है।

शिवसेना शिंदे गुट को अब मुंबई महानगरपालिका चुनाव में अपनी मौजूदगी साबित करने की बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि बीजेपी 227 सीटों में से 150 तक पर अड़ गई है।

इससे शिंदे सेना के लिए सिर्फ 60-70 सीटें बचती हैं जिससे गुट में असंतोष और उद्धव गुट को हमले का मौका मिल रहा है। फडणवीस का कॉन्फिडेंस साफ है कि बीजेपी अकेले 100 सीटें जीतेगी।

पार्टी कम से कम 140-150 सीटें लड़ने की तैयारी में है जिससे बचती 87 सीटें शिंदे गुट, अजीत पवार की एनसीपी और रामदास आठवले की आरपीआई में बांटी जाएंगी।

शिंदे की टेंशन यह है कि यदि 60-70 से ज्यादा सीटें नहीं मिलीं तो पूर्व नगरसेवकों को टिकट कैसे दें? कम सीटों पर समझौता करने से गुट टूट सकता है। राजनीतिक जानकारों की राय है कि मुख्य मुकाबला बीजेपी और उद्धव ठाकरे के बीच है लेकिन शिंदे सेना मुंबई में खुद को असली शिवसेना साबित करने के दवाव में है।

2022 शिवसेना और 2023 एनसीपी विभाजन के बाद 2024 लोकसभा में महाविकास अघाड़ी की जीत हुई, जबकि विधानसभा में महायुति ने जोरदार वापसी की। अब बीएमसी सहित 29 निकाय चुनावों में बीजेपी के दावे से शिंदे की टेंशन बढ़ गया है और गठबंधन एकता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

उद्धव गुट का हमला तैयार है कि शिंदे बीजेपी की कठपुतली बन गए और मुंबई में कोई जगह नहीं बची। शिंदे की मजबूरी यह है कि कम सीटों पर मानने से बगावत का खतरा है, जबकि ज्यादा मांगने से महायुति टूट सकती है।

असली शिवसेना बनाम नकली शिवसेना

असली शिवसेना किसकी है, यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है लेकिन बीएमसी चुनाव में मुंबई की जनता तय करेगी कि 'शिवसेन्ड' किसकी है, स्थानीय निकाय चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण बीएमसी चुनाव राजनीतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है।

सत्ताधारी बीजेपी जहां पहली बार अपना मेयर बनाने का सपना देख रही है, वहीं लगभग ढाई दशक तक बीएमसी की सत्ता पर काबिज रही उद्धव ठाकरे की शिवसेना सता में वापसी के लिए रणनीति बना रही है।

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