
BMC power struggle (सोर्सः सोशल मीडिया)
BMC Power Struggle: मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में पिछले करीब 15 दिनों से जारी सत्ता का संघर्ष अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। सूत्रों के मुताबिक, इस गतिरोध को तोड़ने में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच गुरुवार देर रात हुई ‘डिनर डिप्लोमेसी’ ने अहम भूमिका निभाई है।
दावा किया जा रहा है कि डिनर टेबल पर महायुति के दोनों प्रमुख नेताओं के बीच हुई चर्चा में न केवल मुंबई के अगले महापौर, बल्कि स्थायी समिति समेत अन्य समितियों के अध्यक्ष पदों के बंटवारे का रास्ता भी साफ हो गया है। माना जा रहा है कि अगले दो से तीन दिनों के भीतर भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के पार्षदों के संयुक्त समूह का आधिकारिक पंजीकरण कोकण भवन में कराया जाएगा।
हाल ही में संपन्न बीएमसी चुनावों में भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के गठबंधन वाली महायुति को मतदाताओं का समर्थन मिला था, लेकिन कोई भी दल या गठबंधन अपने दम पर बहुमत हासिल नहीं कर सका। इसके चलते सत्ता में हिस्सेदारी को लेकर दोनों दलों के बीच कई दिनों से रस्साकशी चल रही थी। अब गुरुवार रात हुई मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मुलाकात के बाद सत्ता समीकरण तय होने का दावा किया जा रहा है।
बीएमसी चुनाव परिणामों में भाजपा के सबसे अधिक नगरसेवक चुने गए हैं, लेकिन इसके बावजूद शिवसेना (शिंदे गुट) के सहयोग के बिना बहुमत संभव नहीं था। ऐसे में सत्ता के समीकरण साधने के लिए गहन मंथन के बाद दोनों नेताओं ने अंतिम निर्णय लिया।
सूत्रों के अनुसार, महापौर पद के लिए फिलहाल चार महिला पार्षदों के नाम चर्चा में हैं:
इनमें से किसे मुंबई का महापौर बनाया जाएगा, इसकी आधिकारिक घोषणा जल्द ही गठबंधन के शीर्ष नेतृत्व द्वारा की जाएगी।
पहले की परंपरा के अनुसार, नई सभा की पहली बैठक में महापौर के चुनाव तक कार्यवाही देखने के लिए पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया जाता था, जो या तो पूर्व महापौर या सबसे वरिष्ठ पार्षद होता था। ठाकरे गुट इस पद पर अपने वरिष्ठ पार्षद को नियुक्त कराने की कोशिश में था, लेकिन राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर इस व्यवस्था में बदलाव कर दिया।
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नई व्यवस्था के तहत यह जिम्मेदारी प्रधान सचिव स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है। महापौर और उपमहापौर के चुनाव की प्रक्रिया संपन्न कराने के लिए मुंबई महानगरपालिका आयुक्त भूषण गगरानी को पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया गया है।
बीएमसी के पिछले सदन का कार्यकाल समाप्त हुए लगभग चार साल हो चुके हैं। लंबे समय तक प्रशासक शासन के बाद अब मुंबई को एक निर्वाचित सरकार मिलने जा रही है। ‘डिनर डिप्लोमेसी’ के बाद बनी सहमति से यह स्पष्ट हो गया है कि अगले कुछ दिनों में मुंबई को नया महापौर मिल जाएगा और विकास कार्यों को नई गति मिलेगी।
सूत्रों का यह भी दावा है कि उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के आकस्मिक निधन से उत्पन्न शोकपूर्ण राजनीतिक माहौल ने मुंबई समेत अन्य नगरपालिकाओं के लंबित मसलों को सुलझाने में भूमिका निभाई है। बैठक में केवल बीएमसी ही नहीं, बल्कि राज्य की समग्र राजनीतिक स्थिति और आगामी चुनौतियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।






